इडुक्की (केरल) | 17 फरवरी, 2026 | क्राइम डेस्क [एंकर विजुअल – न्यूज़ स्टूडियो]“नमस्कार, आप देख रहे हैं ‘देश की बात’। केरल के इडुक्की से एक ऐसी खबर आई है जो गुस्से और दुख दोनों से भर देती है। एक 28 साल का युवक, अपनी मंजिल की ओर जा रहा था, लेकिन उसे क्या पता था कि सड़क किनारे मौत उसका इंतजार कर रही है। प्रशासन ने सालों पहले एक पुलिया (Culvert) बनाने के लिए गड्ढा खोदा, काम नहीं हुआ तो उसे खुला छोड़ दिया। कल रात इसी गड्ढे ने जैस बेनी नाम के युवक की जान ले ली। आइए देखते हैं यह खौफनाक मंजर।” न्यूज़ हेडलाइन्स (Main Highlights) दर्दनाक हादसा: इडुक्की में बाइक अनियंत्रित होने के बाद 28 वर्षीय जैस बेनी सड़क किनारे बने एक गहरे गड्ढे में जा गिरे। प्रशासन की बड़ी चूक: यह गड्ढा कई साल पहले एक पुलिया के निर्माण के लिए खोदा गया था, लेकिन काम रुकने के बाद अधिकारियों ने इसे भरने की जहमत नहीं उठाई। CCTV फुटेज: हादसे की पूरी घटना पास में लगे एक सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गई है, जिसमें बाइक को अचानक नियंत्रण खोते और गड्ढे में गिरते देखा जा सकता है। लोगों में गुस्सा: स्थानीय निवासियों ने प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है और इस मौत के लिए सीधे तौर पर स्थानीय अधिकारियों को जिम्मेदार ठहराया है। ग्राउंड रिपोर्ट: नोएडा जैसी घटना की पुनरावृत्ति? [रिपोर्टर वॉयसओवर]जैस बेनी को गड्ढे से निकालकर तुरंत अस्पताल ले जाया गया, लेकिन चोटें इतनी गंभीर थीं कि उन्हें बचाया नहीं जा सका। इस घटना ने पिछले महीने नोएडा के सेक्टर 150 में हुए हादसे की यादें ताजा कर दी हैं, जहाँ युवराज मेहता नामक सॉफ्टवेयर इंजीनियर की कार पानी से भरे गड्ढे में गिरने से उनकी मौत हो गई थी। घटना की मुख्य बातें: सालों पुरानी लापरवाही: स्थानीय लोगों का कहना है कि उन्होंने कई बार प्रशासन को इस गड्ढे के बारे में सचेत किया था, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। सुरक्षा का अभाव: सड़क किनारे इस तरह के खतरनाक गड्ढे के पास न तो कोई बैरिकेडिंग थी और न ही कोई चेतावनी बोर्ड। कानूनी कार्रवाई की मांग: पीड़ित परिवार और ग्रामीणों ने दोषी अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई और FIR दर्ज करने की मांग की है। नोएडा और इडुक्की: समान नियति नोएडा में भी युवराज मेहता की मौत के मामले में पुलिस ने लापरवाही की FIR दर्ज की थी। अब इडुक्की पुलिस भी इस मामले की जांच कर रही है कि आखिर इतने सालों तक इस गड्ढे को खुला क्यों रखा गया। निष्कर्ष विकास के नाम पर खोदे गए गड्ढे जब लोगों की कब्रगाह बनने लगें, तो सवाल सीधे सिस्टम पर उठते हैं। जैस बेनी की मौत एक दुर्घटना नहीं, बल्कि प्रशासनिक लापरवाही का नतीजा है। [एंकर साइन-ऑफ]“कब तक आम जनता इन खुले गड्ढों और लापरवाह सिस्टम की कीमत अपनी जान देकर चुकाएगी? न्यूज़ डेस्क से मैं [AI सहायक], कैमरामैन के साथ।” FacebookShare on XLinkedInWhatsAppEmailCopy Link Post navigation हेल्थ अपडेट: कॉफी के शौकीनों के लिए खुशखबरी! रोजाना 2-3 कप कॉफी कम कर सकती है डिमेंशिया का खतरा हार्दिक सिंह संभालेंगे भारतीय हॉकी की कमान! होबार्ट लेग से कप्तान हरमनप्रीत बाहर, मुश्किल दौर में टीम इंडिया की नई परीक्षा