नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने Draft Income Tax Rules 2026 के जरिए पुरानी टैक्स व्यवस्था (Old Tax Regime) में कई महत्वपूर्ण बदलावों का प्रस्ताव दिया है। पिछले कुछ वर्षों से सरकार का पूरा जोर नई टैक्स व्यवस्था (New Tax Regime) पर रहा है, लेकिन ताजा ड्राफ्ट नियमों ने पुरानी व्यवस्था को एक बार फिर प्रासंगिक बना दिया है।

पुरानी व्यवस्था में क्या-क्या बदला? (मुख्य प्रस्ताव)

  1. मेट्रो शहरों का विस्तार (HRA में बड़ा फायदा): अब तक केवल दिल्ली, मुंबई, कोलकाता और चेन्नई को ही HRA (House Rent Allowance) की 50% गणना के लिए ‘मेट्रो शहर’ माना जाता था। अब इस लिस्ट में बेंगलुरु, हैदराबाद, पुणे और अहमदाबाद को भी शामिल करने का प्रस्ताव है। इससे इन शहरों में रहने वाले किराएदारों की टैक्स छूट काफी बढ़ जाएगी। Income Tax Department India
  2. बच्चों की पढ़ाई और हॉस्टल भत्ता: बच्चों की शिक्षा (Education) और हॉस्टल अलाउंस की सीमा, जो सालों से बहुत कम थी, उसे अब बढ़ाने का प्रस्ताव दिया गया है।
  3. भोजन कूपन (Meal Vouchers): खाने के कूपन की वैल्यू जो पहले ₹50 प्रति मील थी, उसे बढ़ाकर ₹200 प्रति मील करने का सुझाव है।
  4. LTC और यात्रा नियम: लीव ट्रैवल कंसेशन (LTC) में ‘इकोनॉमी क्लास’ की पाबंदी हटाने का प्रस्ताव है। अब कर्मचारी अपनी पात्रता के अनुसार यात्रा का रिफंड ले सकेंगे। Economic Times

पुरानी बनाम नई व्यवस्था: आपके लिए कौन सी बेहतर?

टैक्स विशेषज्ञों के अनुसार, भले ही पुरानी व्यवस्था को ‘पॉलिश’ किया गया है, लेकिन नई टैक्स व्यवस्था अभी भी अधिकांश वेतनभोगी भारतीयों के लिए बेहतर विकल्प बनी हुई है।

  • नई व्यवस्था (New Regime): यह उन लोगों के लिए बेहतरीन है जो निवेश के दस्तावेजों और कागजी कार्रवाई के चक्कर में नहीं पड़ना चाहते। अगर आपकी आय ₹12 लाख तक है और आप केवल स्टैंडर्ड डिडक्शन लेते हैं, तो नई व्यवस्था में आपको कोई टैक्स नहीं देना पड़ता (87A रिबेट के कारण)।
  • पुरानी व्यवस्था (Old Regime): यह अब केवल उन लोगों के लिए फायदेमंद है जो:
    • बेंगलुरु या हैदराबाद जैसे महंगे शहरों में भारी किराया देते हैं।
    • धारा 80C (LIC, PPF) और 80D (मेडिकल बीमा) के तहत पूरी छूट लेते हैं।
    • बच्चों की पढ़ाई और होम लोन के ब्याज पर बड़ी कटौती का दावा करते हैं। ClearTax Guide

विशेषज्ञों की राय

टैक्स हेड गौरव मखीजानी के अनुसार, “यह बदलाव पुरानी व्यवस्था को मजबूत करने के लिए नहीं, बल्कि बढ़ती महंगाई और वर्तमान आर्थिक वास्तविकताओं (जैसे बढ़ता किराया और शिक्षा खर्च) के साथ तालमेल बिठाने के लिए हैं।” डॉ. सुरेश सुराणा का मानना है कि सरकार का अंतिम लक्ष्य एक सरल ‘नई टैक्स व्यवस्था’ ही है, लेकिन जब तक दोनों व्यवस्थाएं साथ हैं, तब तक पुरानी व्यवस्था के उपयोगकर्ताओं को राहत देना जरूरी था।


निष्कर्ष: यदि आप भारी किराया देते हैं और आपके पास बड़े निवेश (Investments) हैं, तो ड्राफ्ट नियमों के लागू होने के बाद पुरानी व्यवस्था आपके लिए ‘गेम-चेंजर’ हो सकती है। हालांकि, मध्यम आय वर्ग के लिए नई व्यवस्था ही सबसे सरल और सस्ती है।


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