लंदन/रियाद: ब्रिटेन के प्रिंस विलियम ब्रिटिश सरकार के अनुरोध पर पहली बार सऊदी अरब की यात्रा पर जा रहे हैं। यह दौरा ऊर्जा सहयोग और युवाओं पर केंद्रित है, लेकिन इसे लेकर कई सवाल उठ रहे हैं।

📌 क्यों विवादित है यह यात्रा?

  • सऊदी अरब का राजनीतिक ढांचा अभी भी सत्तावादी और निरंकुश माना जाता है।
  • मानवाधिकार उल्लंघन और पत्रकार जमाल खशोगी की हत्या जैसी घटनाओं के कारण पश्चिमी देशों में सऊदी नेतृत्व पर आलोचना होती रही है।
  • ऐसे में प्रिंस विलियम का सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान (MBS) से मिलना कूटनीतिक रूप से संवेदनशील माना जा रहा है।

⚖️ संदर्भ

  • प्रिंस विलियम ने पहले एस्टोनिया, पोलैंड, ब्राज़ील और दक्षिण अफ्रीका की यात्राएं की हैं, लेकिन वे उतनी विवादित नहीं थीं।
  • सऊदी अरब अब तेल से परे अपनी अर्थव्यवस्था को विविध बनाने की कोशिश कर रहा है और अंतरराष्ट्रीय मनोरंजन व खेल आयोजनों को बढ़ावा दे रहा है।
  • इसमें रेड सी इंटरनेशनल फ़िल्म फ़ेस्टिवल, सऊदी फ़ॉर्मूला वन ग्रां प्री, और 2034 फ़ुटबॉल वर्ल्ड कप की मेजबानी शामिल है।

✨ सवाल क्यों उठ रहे हैं?

  • आलोचकों का कहना है कि यह यात्रा सऊदी शासन को वैधता प्रदान कर सकती है।
  • वहीं समर्थकों का तर्क है कि यह ब्रिटेन और सऊदी अरब के बीच ऊर्जा व आर्थिक सहयोग को मज़बूत करेगा।
  • रॉयल पैलेस के सूत्रों के मुताबिक़, प्रिंस विलियम अपनी भूमिका को गंभीरता से लेते हैं और सरकार के अनुरोध को स्वीकार करते हैं।

यह यात्रा ब्रिटेन-सऊदी संबंधों के लिए अहम है, लेकिन साथ ही यह मानवाधिकार और कूटनीतिक संतुलन पर बहस को भी तेज़ कर रही है।

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