बांग्लादेश के हालिया चुनावों ने देश की राजनीति में एक बड़ा उलटफेर कर दिया है। जहाँ एक तरफ बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) ने दो-तिहाई बहुमत के साथ सत्ता में वापसी की है, वहीं नोबेल पुरस्कार विजेता मोहम्मद यूनुस और जमात-ए-इस्लामी की भूमिका ने विशेषज्ञों को चौंका दिया है।

मुख्य बातें:

  • जमात-ए-इस्लामी का ऐतिहासिक प्रदर्शन: जमात-ए-इस्लामी, जो पहले कभी 18 से ज्यादा सीटें नहीं जीत पाई थी, उसने इस बार अकेले 68 सीटें और अपने गठबंधन के साथ कुल 71 सीटें जीतकर सबको हैरान कर दिया है। वह अब देश की दूसरी सबसे बड़ी ताकत बनकर उभरी है।
  • मोहम्मद यूनुस का ‘संविधान गेम’: मुख्य सलाहकार मोहम्मद यूनुस ने चुनाव के साथ ही एक ‘रेफरेंडम’ (जनमत संग्रह) भी कराया। इसमें 84 सुधार प्रस्ताव हैं, जो प्रधानमंत्री की शक्तियों को कम कर राष्ट्रपति और विपक्ष की ताकत को बढ़ाएंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि यूनुस जल्द ‘रिटायर’ होने के मूड में नहीं हैं और पर्दे के पीछे से प्रभाव बनाए रखेंगे।
  • भारत के लिए चिंता: जमात ने भारत से सटी सीमाओं (जैसे लालमुनीरहाट और रंगपुर) पर बड़ी जीत हासिल की है। चुनाव प्रचार के दौरान जमात ने भारत-विरोधी रुख अपनाया था। साथ ही, यूनुस ने अमेरिकी धागे (Yarn) के आयात के लिए एक डील की है, जो सीधे तौर पर भारतीय निर्यात को नुकसान पहुँचा सकती है।
  • BNP की चुनौती: हालांकि तारिक रहमान की अगुवाई में BNP ने 212 सीटें जीती हैं, लेकिन उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती भारत नहीं, बल्कि जमात-ए-इस्लामी होगी। जमात आने वाले समय में विश्वविद्यालयों और नई संवैधानिक शक्तियों के जरिए सरकार के लिए मुश्किलें खड़ी कर सकती है।
  • छात्र नेताओं की हार: ‘जेन-जी’ (Gen Z) क्रांतिकारी पार्टी, जिसे यूनुस का समर्थन प्राप्त था, बुरी तरह विफल रही और केवल 5 सीटें ही जीत सकी।

निष्कर्ष: बांग्लादेश में अवामी लीग की अनुपस्थिति ने एक खालीपन पैदा किया है, जिसे अब जमात भरने की कोशिश कर रही है। यूनुस की नई नीतियां और जमात का बढ़ता कद क्षेत्र की स्थिरता और भारत के साथ संबंधों के लिए एक नया मोड़ साबित हो सकता है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *