ढाका/नई दिल्ली: बांग्लादेश में हुए हालिया आम चुनावों के नतीजों ने भारत की चिंता बढ़ा दी है। शेख हसीना के देश छोड़ने के बाद हुए इन पहले राष्ट्रीय चुनावों में बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) ने बड़ी जीत दर्ज की है। लेकिन सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि संसद पहुंचने वाले नेताओं में तीन ऐसे नाम शामिल हैं, जो कुछ समय पहले तक मौत की सजा और गंभीर आतंकी आरोपों का सामना कर रहे थे।

कौन हैं ये तीन विवादित नेता?

1. लुत्फोजम्मन बाबर (BNP):
बाबर पर 2004 में शेख हसीना पर हुए ग्रेनेड हमले की साजिश रचने का आरोप था, जिसमें 24 लोग मारे गए थे। उन्हें निचली अदालत ने मौत की सजा सुनाई थी, लेकिन दिसंबर 2024 में हाई कोर्ट ने उन्हें बरी कर दिया। बाबर ने अपने प्रतिद्वंद्वी को 1.6 लाख वोटों से हराकर जीत दर्ज की है।

2. अब्दुस सलाम पिंटू (BNP):
पिंटू का नाम भारत के नजरिए से सबसे अधिक चिंताजनक है। उन पर पाकिस्तान स्थित आतंकी संगठन हरकत-उल-जिहाद-अल-इस्लामी (Huji) को समर्थन देने का आरोप रहा है। यह संगठन भारत में 2006 के वाराणसी ब्लास्ट, 2007 के अजमेर शरीफ दरगाह हमले और 2011 के दिल्ली धमाकों में शामिल था। पिंटू भी सभी आरोपों से बरी होकर अब 2 लाख से अधिक वोटों से जीतकर संसद पहुंच रहे हैं।

3. एटीएम अजहरुल इस्लाम (जमात-ए-इस्लामी):
जमात-ए-इस्लामी के इस नेता पर 1971 के मुक्ति संग्राम के दौरान 1,200 से अधिक लोगों की हत्या और बलात्कार के गंभीर आरोप थे। 2014 में उन्हें फांसी की सजा सुनाई गई थी। हालांकि, मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम व्यवस्था के दौरान उन्हें सभी आरोपों से मुक्त कर दिया गया।

भारत के लिए क्या हैं मायने?

नई दिल्ली के रणनीतिक नजरिए से, इन नेताओं का संसद पहुंचना एक बड़ी चुनौती हो सकता है। हालांकि, भारतीय अधिकारी BNP नेता तारिक रहमान को लेकर “सतर्क आशावाद” (Cautious Optimism) जता रहे हैं। भारत को उम्मीद है कि आर्थिक वास्तविकताओं और क्षेत्रीय स्थिरता को देखते हुए नई सरकार भारत के साथ व्यावहारिक कूटनीतिक संबंध बनाए रखेगी।


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