ढाका, 12 फरवरी 2026 को होने वाले चुनाव बांग्लादेश की राजनीति के लिए ऐतिहासिक हैं। पहली बार ऐसा होगा कि चुनावी अखाड़े में “दो बेगमों” की लड़ाई नहीं होगी। अवामी लीग पहले ही चुनाव से बाहर है और अब मुकाबला मुख्य रूप से बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) और जमात-ए-इस्लामी गठबंधन के बीच है।

BNP की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

  • स्थापना: 1978 में राष्ट्रपति जियाउर रहमान ने BNP की नींव रखी।
  • विचारधारा: “बांग्लादेशी राष्ट्रवाद” – राष्ट्रीय एकता, इस्लामी सांस्कृतिक मूल्यों और बहुदलीय लोकतंत्र पर जोर।
  • नीतियाँ: मुक्त-बाजार अर्थव्यवस्था, पश्चिमी और मध्य-पूर्वी देशों से संबंध।
  • 1981: जियाउर की हत्या के बाद पार्टी का नेतृत्व उनकी पत्नी खालिदा जिया ने संभाला।
  • 1991: BNP ने चुनाव जीतकर खालिदा जिया को देश की पहली महिला प्रधानमंत्री बनाया।

खालिदा जिया की विरासत

  • सैन्य शासन के खिलाफ बड़े आंदोलनों का नेतृत्व।
  • लोकतंत्र की बहाली में अहम भूमिका।
  • निजीकरण और राजनीति में सेना के प्रभाव को कम करने की कोशिश।
  • कई बार सत्ता और विपक्ष दोनों में रहकर BNP को मजबूत किया।

तारिक रहमान की भूमिका

  • खालिदा जिया के बेटे तारिक रहमान अब पार्टी की कमान संभाल रहे हैं।
  • वे 17 साल के निर्वासन के बाद बांग्लादेश लौटे हैं।
  • यह चुनाव उनके लिए राजनीतिक परीक्षा है – क्या वे अपनी मां और पिता की विरासत को आगे बढ़ा पाएंगे?
  • BNP के भीतर उन्हें “नेक्स्ट जनरेशन लीडर” के रूप में देखा जा रहा है।

चुनावी परिदृश्य

  • अवामी लीग बैन होने के कारण BNP को बड़ा मौका मिला है।
  • जमात-ए-इस्लामी के साथ गठबंधन विपक्षी वोटों को एकजुट कर सकता है।
  • भारत और अन्य पड़ोसी देशों की नजर इस चुनाव पर है, क्योंकि यह बांग्लादेश के लोकतंत्र की दिशा तय करेगा।

📌 निष्कर्ष: BNP अपने इतिहास के सबसे अहम चुनाव का सामना कर रही है। खालिदा जिया की विरासत को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी अब तारिक रहमान पर है। यह चुनाव तय करेगा कि BNP सिर्फ अतीत की ताकत पर खड़ी है या भविष्य की राजनीति में भी निर्णायक भूमिका निभा सकती है।

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