नई दिल्ली/ढाका: बांग्लादेश में 12 फरवरी को न केवल आम चुनाव हुए, बल्कि देश के भविष्य के लिए एक ऐतिहासिक जनमत संग्रह (Referendum) भी हुआ। चुनाव आयोग के ताजा आंकड़ों के अनुसार, बांग्लादेश की लगभग 70% जनता ने नए ‘जुलाई नेशनल चार्टर 2025’ के पक्ष में ‘हाँ’ (Yes) का वोट दिया है।

इस चार्टर का उद्देश्य देश की शासन व्यवस्था को पूरी तरह से बदलना और भविष्य में किसी भी तरह की तानाशाही को रोकना है।

क्या है ‘जुलाई चार्टर’?

जुलाई चार्टर 2024 में हुए छात्र आंदोलन और शेख हसीना के सत्ता से हटने के बाद तैयार किया गया एक सुधार पैकेज है। इसमें राज्य के पुनर्गठन के लिए कुल 84 सुधार बिंदु शामिल हैं। इसे लागू करने के लिए एक ‘संवैधानिक सुधार परिषद’ बनाई जाएगी, जो 270 दिनों के भीतर इन बदलावों को जमीन पर उतारेगी।

चार्टर के 5 बड़े बदलाव जो बांग्लादेश को बदल देंगे:

  1. प्रधानमंत्री के कार्यकाल की सीमा: अब कोई भी व्यक्ति लंबे समय तक प्रधानमंत्री की कुर्सी पर नहीं बैठ पाएगा। तानाशाही रोकने के लिए कार्यकाल की सख्त समय सीमा तय की जाएगी।
  2. दो सदनों वाली संसद (Bicameral Parliament): अभी तक बांग्लादेश में एक ही सदन था, अब 100 सीटों वाला एक ‘उच्च सदन’ (Upper House) बनाया जाएगा। इससे विधायी शक्तियों का संतुलन बना रहेगा।
  3. प्रधानमंत्री की शक्तियों में कटौती: राष्ट्रपति की भूमिका को मजबूत किया जाएगा ताकि सारी कार्यकारी शक्तियां सिर्फ प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) में केंद्रित न रहें।
  4. विपक्ष को बड़ी जिम्मेदारी: अब विपक्षी नेताओं को महत्वपूर्ण संसदीय समितियों का अध्यक्ष और ‘डिप्टी स्पीकर’ जैसे पद दिए जाएंगे, ताकि लोकतंत्र में सबकी भागीदारी हो।
  5. संस्थानों की आजादी: न्यायपालिका और अन्य सरकारी संस्थानों को राजनीतिक हस्तक्षेप से पूरी तरह मुक्त करने के कड़े नियम बनाए गए हैं।

जनमत संग्रह के नतीजे (आंकड़ों में):

  • कुल मतदान: 60.26%
  • ‘हाँ’ (Yes) के पक्ष में वोट: 4,80,74,429
  • ‘ना’ (No) के पक्ष में वोट: 2,25,65,627

‘जुलाई फाइटर्स’ को सुरक्षा

इस चार्टर में 2024 के विद्रोह में शामिल छात्रों और प्रदर्शनकारियों (जिन्हें ‘जुलाई फाइटर्स’ कहा जा रहा है) को कानूनी सुरक्षा देने और संसद में महिलाओं का प्रतिनिधित्व बढ़ाने का भी प्रस्ताव है।


निष्कर्ष: जहाँ एक ओर तारिक रहमान के नेतृत्व में BNP सरकार बनाने की तैयारी कर रही है, वहीं इस चार्टर की मंजूरी का मतलब है कि नई सरकार को अब इन कड़े लोकतांत्रिक नियमों के दायरे में रहकर काम करना होगा।

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