भारतीय आईटी दिग्गज जैसे TCS, Infosys और Wipro के लिए हाल ही में आई दो रिपोर्ट्स ने निवेशकों और टेक जगत की चिंता बढ़ा दी है। Citrini Research और Jeffries ने अपनी रिपोर्ट्स में दावा किया है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) भारतीय आईटी कंपनियों के पारंपरिक बिजनेस मॉडल को खत्म कर सकता है।

इस विवाद की मुख्य बातें यहाँ दी गई हैं:

1. Citrini Research: “2028 तक भारतीय IT का अंत?”

सिट्रिनी रिसर्च की एक रिपोर्ट सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है, जिसे ‘2028 का वैश्विक खुफिया संकट’ नाम दिया गया है।

  • भविष्यवाणी: रिपोर्ट का दावा है कि 2028 तक भारतीय आईटी सेक्टर पूरी तरह से तबाह हो जाएगा। रुपया डॉलर के मुकाबले 18% तक गिर जाएगा और प्रमुख आईटी कंपनियों की मार्केट वैल्यू से $50 बिलियन साफ हो जाएंगे।
  • तर्क: सिट्रिनी का कहना है कि भारतीय इंजीनियरों की जगह ‘AI कोडिंग एजेंट्स’ ले लेंगे, जिन्हें चलाने का खर्च सिर्फ बिजली के बिल जितना होगा। रिपोर्ट के अनुसार, मानवीय बुद्धि (Human Intelligence) की कीमत कम हो जाएगी क्योंकि AI अब हर जगह प्रचुर मात्रा में उपलब्ध होगा।

2. Jeffries: “IT शेयरों की कीमतों में 33% तक गिरावट”

जहाँ सिट्रिनी की रिपोर्ट थोड़ी काल्पनिक (Fiction) लगती है, वहीं वित्तीय सलाहकार फर्म जेफरीज (Jeffries) की रिपोर्ट अधिक व्यावहारिक है।

  • डाउनग्रेड: जेफरीज ने भारतीय आईटी शेयरों की रेटिंग घटा दी है। उनका कहना है कि AI की वजह से इन कंपनियों के रेवेन्यू (आय) और मुनाफे के मार्जिन पर गहरा असर पड़ेगा।
  • चेतावनी: जेफरीज ने अनुमान लगाया है कि आईटी कंपनियों के शेयरों की कीमतें उनके वर्तमान स्तर से 33% तक गिर सकती हैं

3. हकीकत या सिर्फ बढ़ा-चढ़ाकर कही गई बात (Hyperbole)?

बाजार के जानकारों का मानना है कि ‘भारतीय आईटी का अंत’ कहना अभी जल्दबाजी और अतिशयोक्ति होगी।

  • कमजोर तर्क: आलोचकों का कहना है कि सिट्रिनी की रिपोर्ट मानवीय संस्थानों के काम करने के तरीके और सरकारी हस्तक्षेप को नजरअंदाज करती है। कोई भी बदलाव रातों-रात नहीं बल्कि धीरे-धीरे आता है।
  • अनुकूलन (Adaptation): भारतीय आईटी कंपनियां खुद को AI के अनुसार ढाल रही हैं। जब भी कोई नई तकनीक (जैसे इंटरनेट या क्लाउड) आई है, भारतीय आईटी सेक्टर ने खुद को बदलकर और मजबूती से वापसी की है।

निष्कर्ष (In Short):

सिट्रिनी की रिपोर्ट जहाँ ‘डरावनी कहानी’ जैसी लगती है, वहीं जेफरीज की रिपोर्ट निवेशकों के लिए एक ‘गंभीर चेतावनी’ है। भारतीय आईटी क्षेत्र के लिए आने वाले कुछ साल चुनौतीपूर्ण हो सकते हैं, लेकिन यह ‘अंत’ होगा, ऐसा कहना मुश्किल है।

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