नई दिल्ली/वॉशिंगटन – भारत और अमेरिका के बीच नई ट्रेड डील की घोषणा के बाद दोनों देशों में बहस तेज हो गई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को इस समझौते का ऐलान किया, जिसमें भारत पर लगने वाला टैरिफ़ 50% से घटाकर 18% कर दिया गया है। अमेरिकी पक्ष व्हाइट हाउस की प्रेस सेक्रेटरी कैरोलाइन लेविट ने इसे अमेरिकी कारोबारियों, कामगारों और उपभोक्ताओं के लिए बड़ी जीत बताया। ट्रंप ने दावा किया कि भारत रूस से तेल आयात बंद करेगा, अमेरिकी सामान पर ज़ीरो टैरिफ़ लगाएगा और 500 अरब डॉलर के अमेरिकी उत्पाद खरीदेगा। अमेरिकी मीडिया जैसे न्यूयॉर्क टाइम्स ने सवाल उठाए कि इन शर्तों पर भारत ने आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। भारत के लिए फायदे 18% टैरिफ़ दर से भारत की टेक्सटाइल, चमड़ा, आभूषण, खिलौने और फर्नीचर जैसी श्रम-प्रधान इंडस्ट्री को अमेरिकी बाज़ार में बढ़त मिलेगी। यह दर पाकिस्तान (19%), वियतनाम और बांग्लादेश (20%) से कम है, जिससे भारतीय कंपनियों को प्रतिस्पर्धा में लाभ मिलेगा। चुनौतियाँ ऐतिहासिक रूप से भारत पर अमेरिकी टैरिफ़ 3% के आसपास रहा है, ऐसे में 18% अभी भी बहुत ऊँचा माना जा रहा है। रूस से तेल आयात बंद करना भारत के लिए रणनीतिक और आर्थिक रूप से कठिन होगा। अमेरिकी कृषि और डेयरी उत्पाद भारतीय उपभोक्ताओं के लिए स्वीकार्य नहीं हो सकते, जिससे व्यापार संतुलन पर असर पड़ सकता है। 📌निष्कर्ष: अमेरिकी मीडिया इस डील को अमेरिका के पक्ष में झुका हुआ बता रहा है क्योंकि इसमें अमेरिकी उत्पादों को भारत में आसान प्रवेश और रूस से तेल आयात रोकने जैसी शर्तें शामिल हैं। भारत को कुछ निर्यात क्षेत्रों में लाभ मिलेगा, लेकिन ऊँचे टैरिफ़ और कठिन शर्तें इसे संतुलित नहीं करतीं। 👉 चाहें तो मैं इसे आपके लिए फायदे बनाम नुकसान की तुलना तालिका में भी बदल सकता हूँ, ताकि खबर और स्पष्ट हो जाए। FacebookShare on XLinkedInWhatsAppEmailCopy Link Post navigation अमेरिकी मीडिया का दृष्टिकोण पाकिस्तान पर यूएई का दबाव, 2 अरब डॉलर का संकट गहराया