भारत और यूरोपीय संघ (EU) के बीच हुए ऐतिहासिक मुक्त व्यापार समझौते (FTA) पर अमेरिका की पैनी नजर है। डोनाल्ड ट्रंप के व्यापार प्रतिनिधि जेमिसन ग्रीर का मानना है कि इस डील से भारत को बहुत बड़ा फायदा होने वाला है और वह “मौज (Heyday)” करने वाला है। मुख्य बातें: यूरोपीय बाजार तक पहुंच: ग्रीर ने फॉक्स बिजनेस को दिए इंटरव्यू में कहा, “मेरा मानना है कि इस डील में भारत सबसे ऊपर रहा है। सच तो यह है कि उन्हें अब यूरोप के बाजारों में बहुत ज्यादा पहुंच मिल गई है।” सस्ते श्रम और इमिग्रेशन का लाभ: अमेरिकी अधिकारी ने संकेत दिया कि भारत को इस समझौते के तहत अतिरिक्त ‘इमिग्रेशन अधिकार’ (Immigration rights) मिल सकते हैं। यूरोपीय संघ के नेताओं ने भारतीय कामगारों के लिए यूरोप में ‘मोबिलिटी’ (आवाजाही) की बात की है, जिसका लाभ भारत के ‘लो-कॉस्ट लेबर’ को मिलेगा। भारत-अमेरिका व्यापार पर पेंच: जहाँ एक तरफ भारत-EU की दोस्ती बढ़ रही है, वहीं अमेरिका के साथ टैरिफ कम करने पर अभी भी पेंच फंसा हुआ है। ग्रीर ने स्पष्ट किया कि भारत को रूसी तेल की खरीद कम करने के लिए अभी और काम करना होगा। उन्होंने कहा, “भारत को रूसी तेल पर मिलने वाला डिस्काउंट पसंद है, इसलिए उनके लिए इससे पूरी तरह पीछे हटना मुश्किल हो रहा है।” मदर ऑफ ऑल डील्स: भारत-EU समझौते को “मदर ऑफ ऑल डील्स” कहा जा रहा है, जो दुनिया की 25% जीडीपी और एक-तिहाई वैश्विक व्यापार को कवर करता है। इसमें टेक्सटाइल से लेकर दवाओं तक लगभग सभी सामानों पर व्यापार शुल्क खत्म हो जाएगा। रक्षा और सुरक्षा: व्यापार के अलावा, भारत और EU ने रक्षा, सुरक्षा सहयोग और कुशल श्रमिकों व छात्रों की आवाजाही को आसान बनाने पर भी सहमति जताई है। निष्कर्ष: ट्रंप प्रशासन का यह बयान दिखाता है कि भारत की वैश्विक कूटनीति सफल रही है। एक तरफ भारत ने यूरोप के साथ बड़ा समझौता किया है, वहीं दूसरी तरफ वह अमेरिका के साथ भी टैरिफ कम करने के लिए कड़ा मोलभाव (hard bargaining) कर रहा है। FacebookShare on XLinkedInWhatsAppEmailCopy Link Post navigation पीएम मोदी की संभावित इजरायल यात्रा: फरवरी में रणनीतिक रिश्तों को मिल सकती है नई धार भारत-EU ‘मदर ऑफ ऑल डील्स’: क्या डोनाल्ड ट्रंप की नीतियों को मिलेगी चुनौती?