पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव से ठीक कुछ महीने पहले मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का एक बड़ा राजनीतिक दांव सामने आया है। उन्होंने भाजपा के राज्यसभा सांसद नागेन रॉय, जिन्हें अनंत महाराज के नाम से जाना जाता है, को राज्य के सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘बंग विभूषण’ से सम्मानित किया है।

इस फैसले के पीछे के मुख्य कारण और समीकरण नीचे दिए गए हैं:

1. राजबंशी वोट बैंक पर नजर

अनंत महाराज उत्तर बंगाल के राजबंशी समुदाय के सबसे प्रभावशाली नेता माने जाते हैं।

  • 2011 की जनगणना के अनुसार, बंगाल में राजबंशी आबादी लगभग 33 लाख है।
  • उत्तर बंगाल की कई सीटों पर इस समुदाय का सीधा प्रभाव है। पिछले कुछ चुनावों में तृणमूल कांग्रेस (TMC) को यहाँ काफी संघर्ष करना पड़ा है, जबकि भाजपा ने यहाँ बेहतरीन प्रदर्शन किया है।

2. सांस्कृतिक पहचान को सम्मान

ममता बनर्जी ने इस सम्मान को पूरी तरह ‘सांस्कृतिक’ रंग दिया है। उन्होंने कहा कि यह पुरस्कार अनंत महाराज को राजबंशी भाषा और संस्कृति के प्रचार-प्रसार के लिए दिया गया है।

  • अनंत महाराज ने ‘अधिकारी दर्शन ज्योति’ जैसी पुस्तकें लिखी हैं, जो राजबंशी समुदाय के रीति-रिवाजों का दस्तावेजीकरण करती हैं।
  • TMC इसके जरिए यह संदेश देना चाहती है कि वह राजबंशी पहचान का सम्मान करती है।

3. चुनाव से पहले रणनीतिक ‘टाइमिंग’

विधानसभा चुनाव नजदीक हैं और उत्तर बंगाल में अपनी खोई हुई जमीन वापस पाने के लिए ममता बनर्जी का यह कदम काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

  • भले ही अनंत महाराज ने फिलहाल दल बदलने से इनकार किया है, लेकिन ममता बनर्जी के साथ उनकी मंच साझा करने की तस्वीरों ने भाजपा के लिए असहज स्थिति पैदा कर दी है।
  • हाल ही में उन्होंने मतदाता सूची के पुनरीक्षण (SIR) को लेकर चुनाव आयोग और व्यवस्था पर नाराजगी जाहिर की थी, जिसका फायदा उठाने में ममता बनर्जी पीछे नहीं रहीं।

4. क्या है अनंत महाराज का रुख?

सम्मान मिलने के बाद अनंत महाराज ने कहा कि उन्होंने कभी सपने में भी यह नहीं सोचा था कि उन्हें यह सम्मान मिलेगा। हालांकि, जब उनसे पार्टी बदलने के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने स्पष्ट किया:

“क्या मैंने कोई पार्टी जॉइन की है? नहीं। क्या अभी इसकी कोई संभावना है? मुझे इसमें कोई दिलचस्पी नहीं है।”


मुख्य बातें:

  • पुरस्कार: बंग विभूषण (पश्चिम बंगाल का सर्वोच्च सम्मान)।
  • स्थान: कोलकाता का देशप्रिय पार्क (मातृभाषा दिवस के अवसर पर)।
  • प्रभाव: उत्तर बंगाल के कूचबिहार, जलपाईगुड़ी और मालदा जैसे जिलों में चुनावी समीकरण बदल सकते हैं।

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