नई दिल्ली – केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने करीब 53 लाख करोड़ रुपये का बजट पेश किया। इस बजट की सबसे बड़ी घोषणा रही हाईस्पीड रेल नेटवर्क, जिसके जरिए भारत को चीन और यूरोप जैसी तेज़ रफ्तार ट्रेन सुविधा देने का लक्ष्य है।

सात हाईस्पीड रेल कॉरिडोर

सरकार ने 7 हाईस्पीड रेल कॉरिडोर बनाने का ऐलान किया है, जिन पर करीब 16 लाख करोड़ रुपये खर्च होंगे।

  • मुंबई–पुणे
  • पुणे–हैदराबाद
  • हैदराबाद–बेंगलुरु
  • हैदराबाद–चेन्नई
  • चेन्नई–बेंगलुरु
  • दिल्ली–वाराणसी
  • वाराणसी–सिलीगुड़ी

दक्षिण भारत पर खास जोर

  • चेन्नई से बेंगलुरु का सफर सिर्फ 1 घंटा 13 मिनट में पूरा होगा।
  • बेंगलुरु–हैदराबाद की दूरी 2 घंटे में तय होगी।
  • चेन्नई–हैदराबाद का सफर 2 घंटे 55 मिनट में पूरा होगा।
  • तेलंगाना, कर्नाटक और तमिलनाडु की राजधानियों को आपस में जोड़ा जाएगा।
  • पुणे और हैदराबाद को भी अहमदाबाद–मुंबई प्रोजेक्ट से जोड़ा जाएगा।

उत्तर भारत और पूर्वोत्तर को भी सौगात

  • दिल्ली से वाराणसी और वाराणसी से सिलीगुड़ी तक हाईस्पीड रेल कॉरिडोर बनेगा।
  • इससे बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल और असम के शहर जुड़ेंगे।
  • यूपी और बिहार जैसे पिछड़े क्षेत्रों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने की कोशिश होगी।

वैश्विक तुलना

  • चीन: 45,000 किमी लंबा हाईस्पीड नेटवर्क (350 किमी/घंटा की रफ्तार)।
  • यूरोप: 8,500 किमी से अधिक हाईस्पीड लाइनें (फ्रांस, स्पेन, जर्मनी, इटली में सबसे बड़ा नेटवर्क)।
  • जापान: 3,096 किमी शिनकानसेन नेटवर्क।
  • भारत: अब यूरोप और चीन की तर्ज पर हाईस्पीड रेल नेटवर्क की ओर कदम।

निष्कर्ष

मोदी सरकार का यह बजट भारत को हाईस्पीड रेल युग में ले जाने की दिशा में बड़ा कदम है। दिल्ली, मुंबई और चेन्नई जैसे मेट्रो शहरों को जोड़ने के साथ-साथ दक्षिण और पूर्वोत्तर भारत को भी इस नेटवर्क से जोड़ा जाएगा। इससे न सिर्फ यात्रा समय घटेगा बल्कि क्षेत्रीय विकास और आर्थिक गतिविधियों को नई गति मिलेगी।

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