नई दिल्ली, फरवरी 2026 – पूर्व सेना प्रमुख जनरल एम.एम. नरवणे की किताब में डोकलाम विवाद के दौरान चीनी टैंकों की मौजूदगी का उल्लेख सामने आने के बाद राजनीतिक और सुरक्षा हलकों में बहस छिड़ गई है। राहुल गांधी का बयान राहुल गांधी ने इस किताब को लेकर राष्ट्रीय सुरक्षा पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि इस तरह की जानकारियां सार्वजनिक होने से भारत की सुरक्षा रणनीति पर असर पड़ सकता है। राहुल गांधी का तर्क है कि संवेदनशील सैन्य सूचनाओं को सार्वजनिक करने से चीन को फायदा मिल सकता है। पूर्व DGP एस.पी. वैद की प्रतिक्रिया जम्मू-कश्मीर के पूर्व डीजीपी एस.पी. वैद ने इस विवाद पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि “ऐसी बातें दफ्न हो जानी चाहिए” यानी इन्हें सार्वजनिक मंच पर नहीं लाना चाहिए। वैद का मानना है कि राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी संवेदनशील जानकारी को किताबों या सार्वजनिक विमर्श में उजागर करना उचित नहीं है। पृष्ठभूमि डोकलाम विवाद 2017 में भारत-चीन के बीच हुआ था, जब दोनों देशों की सेनाएं आमने-सामने थीं। जनरल नरवणे की किताब में इस दौरान चीनी टैंकों की मौजूदगी का उल्लेख किया गया है। इस खुलासे ने राजनीतिक हलकों में चर्चा छेड़ दी है कि क्या ऐसी जानकारी सार्वजनिक होनी चाहिए या नहीं। 📌 निष्कर्ष: यह विवाद दिखाता है कि भारत में राष्ट्रीय सुरक्षा और सैन्य रणनीति पर सार्वजनिक विमर्श कितना संवेदनशील है। एक ओर पारदर्शिता और ऐतिहासिक दस्तावेज़ीकरण की बात है, वहीं दूसरी ओर सुरक्षा हितों को ध्यान में रखते हुए कई लोग मानते हैं कि ऐसी जानकारियां सार्वजनिक नहीं होनी चाहिए। FacebookShare on XLinkedInWhatsAppEmailCopy Link Post navigation India-US Trade Deal: वरिष्ठ पत्रकार का खुलासा और राजनीतिक पृष्ठभूमि सुप्रीम कोर्ट में आज SIR पर सुनवाई: ममता बनर्जी खुद रखेंगी दलीलें