पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, केरल और असम के आंकड़े बताते हैं अलग तस्वीर नई दिल्ली। आगामी विधानसभा चुनावों में महिलाओं की भागीदारी बढ़ रही है, लेकिन जीत का प्रतिशत उतना नहीं बढ़ पाया है। पिछले दो दशकों के आंकड़े बताते हैं कि पुरुष उम्मीदवारों की सफलता दर स्थिर रही है, जबकि महिलाओं की जीत दर कई राज्यों में गिरावट दर्ज कर रही है। पश्चिम बंगाल ममता बनर्जी के नेतृत्व के बावजूद महिलाओं की जीत दर घटी है। 2001 में महिलाओं की जीत दर 24.6% थी, जो 2021 में घटकर 16.7% रह गई। फिर भी, महिलाओं की जीत दर पुरुषों से लगातार अधिक रही है (2021 में पुरुष 13.4%, महिलाएँ 16.7%)। तमिलनाडु 2001 में महिलाओं की जीत दर 22.3% थी। 2021 में यह घटकर मात्र 2.9% रह गई। 2001 से 2016 तक महिलाएँ पुरुषों से बेहतर प्रदर्शन करती रहीं, लेकिन 2021 में पुरुषों की जीत दर (6.2%) महिलाओं से अधिक रही। केरल उच्च महिला साक्षरता के बावजूद महिलाओं की जीत दर लगातार कम रही। 2001 में 14.8% से घटकर 2016 में 7.3% तक पहुँची। भागीदारी बढ़ी, लेकिन जीत अनुपात नहीं बढ़ा। असम महिलाओं की सफलता दर उतार-चढ़ाव भरी रही। 2001 में 18.2% जीत दर थी, जो 2021 में घटकर 7.9% रह गई। पुरुषों की जीत दर स्थिर रही (लगभग 12–14%)। महिलाओं की चुनावी भागीदारी बढ़ रही है, लेकिन जीत का अनुपात घट रहा है। यह दर्शाता है कि राजनीतिक प्रतिनिधित्व में संख्या बढ़ने से सफलता स्वतः नहीं मिलती, बल्कि इसके लिए सामाजिक, राजनीतिक और संरचनात्मक समर्थन भी ज़रूरी है। FacebookShare on XLinkedInWhatsAppEmailCopy Link Post navigation Quote of the Day: Brad Smith भारतीय बाइकर्स का रुझान बड़ी और ताकतवर मोटरसाइकिलों की ओर