घाव पर चाट लिया तो बढ़ सकता है रेबीज का खतरा, रोजाना 350 लोग पहुंच रहे एआरवी क्लिनिक बरेली। शहर में कुत्तों के काटने के साथ ही चाटने और खरोंचने से रेबीज के डर के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। डॉक्टरों का कहना है कि सामान्य चाटने से रेबीज नहीं होता, लेकिन यदि कुत्ता किसी घाव वाले हिस्से पर लार लगा दे या नाखून से खरोंच दे तो खतरा बढ़ जाता है। मुख्य तथ्य एआरवी क्लिनिक पर भीड़: तीन सौ बेड अस्पताल के एआरवी क्लिनिक में रोजाना औसतन 350 लोग टीकाकरण कराने पहुंच रहे हैं। डॉक्टरों की सलाह: शरीर पर सामान्य चाटने से रेबीज नहीं होता। घाव पर लार लगने या नाखून की खरोंच से संक्रमण का खतरा रहता है। पालतू कुत्ते को टीका लगा होने पर भी काटने या खरोंचने पर एआरवी जरूरी है। टीकाकरण प्रक्रिया: काटने पर चार डोज लगती हैं—जीरो, तीसरे, सातवें और 28वें दिन। गहरे घाव या कई जगह काटने पर सीरम की डोज भी दी जाती है। छह महीने बाद दोबारा काटने पर बूस्टर डोज जीरो और तीसरे दिन लगती है। अनिश्चित स्थिति में प्री-एक्सपोजर डोज जीरो, सातवें और 28वें दिन दी जाती है। डर और भ्रांतियाँ कई लोग अनावश्यक भय से भी टीकाकरण करा रहे हैं, जैसे गिलास चाटने या दूध पीने के बाद आशंका। डॉक्टर मरीजों को समझाकर सही जानकारी देते हैं और आवश्यकतानुसार टीका लगाते हैं। असर बरेली में रेबीज को लेकर जागरूकता बढ़ रही है, लेकिन साथ ही डर और भ्रांतियाँ भी सामने आ रही हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि सही जानकारी और समय पर टीकाकरण ही बचाव का सबसे बड़ा उपाय है। FacebookShare on XLinkedInWhatsAppEmailCopy Link Post navigation बदल गई तस्वीर! अब बेंगलुरु-दिल्ली नहीं, बरेली में लगेगा दिग्गजों का डेरा बरेली जंक्शन पर ‘राम भरोसे’ सुरक्षा