नई दिल्ली:
इमरान खान की कहानी किसी शेक्सपियर के नाटक जैसी है—एक ऐसा नायक जिसने शून्य से शिखर तक का सफर तय किया, लेकिन अंत में अपनी उन्हीं खूबियों के कारण अकेला रह गया।

प्रतिभा को परखने वाली पारखी नजर
इमरान खान केवल एक महान कप्तान नहीं, बल्कि प्रतिभा के ‘जौहरी’ थे। उन्होंने पाकिस्तान को वह पीढ़ी दी जिसने दशकों तक क्रिकेट पर राज किया:

  • वसीम अकरम: नेट्स में एक अनजान लड़के को देखकर इमरान ने तुरंत पहचान लिया कि वह दुनिया का सर्वश्रेष्ठ गेंदबाज बनेगा।
  • वकार युनिस: इमरान एक दिन बीमार थे और टीवी पर एक स्थानीय मैच देख रहे थे। वहां उन्होंने वकार की रफ्तार देखी और अगले ही दिन उन्हें नेट्स पर बुला लिया।
  • इंजमाम-उल-हक: मुल्तान के इस युवा बल्लेबाज को नेट्स में वसीम और वकार का सामना करते हुए केवल 5 मिनट देखने के बाद इमरान ने घोषणा कर दी थी कि यह लड़का 1992 का विश्व कप जिताएगा।

1992 विश्व कप: ‘कॉर्नर्ड टाइगर’ का गर्जना
39 साल की उम्र में, जब दुनिया उन्हें चुका हुआ मान रही थी, इमरान ने इतिहास रचा:

  • ड्रेसिंग रूम का वह भाषण: टूर्नामेंट की शुरुआत बेहद खराब रही। जब टीम बाहर होने की कगार पर थी, इमरान ने अपने लड़कों से कहा, “एक कोने में फंसा हुआ बाघ (Cornered Tiger) दुनिया का सबसे खतरनाक जानवर होता है।”
  • अंतिम मिशन: फाइनल में उन्होंने खुद 72 रनों की पारी खेलकर जिम्मेदारी ली। वसीम अकरम की जादुई गेंदों और इंजमाम के जुनून ने पाकिस्तान को विश्व विजेता बना दिया। इसके बाद इमरान ने फिर कभी गेंदबाजी नहीं की; उन्होंने अपने करियर को पूर्णता के साथ समाप्त किया।

राजनीति का ‘शेक्सपियर’ जैसा अंत
क्रिकेट की पिच पर जो जिद इमरान की ताकत थी, राजनीति में वही उनकी कमजोरी बन गई:

  • सेना से सीधा टकराव: पाकिस्तान की राजनीति में जहां नेता अक्सर समझौतों के जरिए लंदन या दुबई भाग जाते हैं, इमरान ने जमीन नहीं छोड़ी। उन्होंने उस सैन्य प्रतिष्ठान को चुनौती दी जिसने उन्हें कभी सत्ता तक पहुँचाने में मदद की थी।
  • गलत दांव: इमरान को यकीन था कि उनके एक आह्वान पर लाखों लोग सड़कों पर उतर आएंगे और जनरल झुक जाएंगे। लेकिन जैसा कि उपन्यासकार मोहम्मद हनीफ ने लिखा—”इमरान ने गलत घोड़े पर दांव लगाया।” जनता का वह हुजूम उस समय नहीं आया जब उन्हें सबसे ज्यादा जरूरत थी।

मौजूदा स्थिति: एक अकेला सेनानी
आज इमरान खान जेल की एक कालकोठरी में बंद हैं। वह शख्स जिसने कभी खचाखच भरे स्टेडियमों और लाखों की भीड़ को मंत्रमुग्ध किया था, आज एक आंख की रोशनी कम होने के बावजूद अकेले अपनी लड़ाई लड़ रहा है। स्टेडियम शांत है, मैच खत्म हो चुका है, और वह ‘बाघ’ उस भीड़ का इंतजार कर रहा है जो शायद अब कभी नहीं आएगी।

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