बांग्लादेश के हालिया चुनाव पिछले 17 वर्षों में पहले ‘वास्तविक प्रतिस्पर्धी’ चुनाव माने जा रहे हैं। 18 महीने पहले शुरू हुए ‘जेन-जी’ (Gen-Z) विरोध प्रदर्शनों ने न केवल शेख हसीना की सरकार को गिराया, बल्कि देश की राजनीति की दिशा भी बदल दी। मुख्य विश्लेषण: बीएनपी (BNP) का उदय: स्थानीय नेटवर्क के अनुसार, बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) सबसे बड़ी राजनीतिक ताकत बनकर उभरी है। 17 साल के निर्वासन के बाद लौटे तारिक रहमान का प्रधानमंत्री बनना लगभग तय है। उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती वंशवादी राजनीति के लेबल को हटाकर युवाओं की उम्मीदों पर खरा उतरने की होगी। संवैधानिक सुधार: बांग्लादेशियों ने एक ऐतिहासिक जनमत संग्रह (Referendum) में भी मतदान किया है, जिसमें प्रधानमंत्री के कार्यकाल को 10 साल तक सीमित करने का प्रस्ताव है। यह कदम देश में तानाशाही व्यवस्था को खत्म कर लोकतांत्रिक संतुलन बनाने की कोशिश है। भारत बनाम चीन: भारत: नई दिल्ली की नीति काफी हद तक शेख हसीना पर टिकी थी, जो अब भारत में निर्वासन में हैं। बांग्लादेश में हसीना के खिलाफ ‘मानवता के खिलाफ अपराध’ के लिए मौत की सजा सुनाई गई है, जिससे भारत के लिए कूटनीतिक स्थिति जटिल हो गई है। चीन: इसके विपरीत, चीन ने किसी व्यक्ति के बजाय दीर्घकालिक निवेश पर ध्यान केंद्रित किया है, जो सत्ता परिवर्तन के बावजूद सुरक्षित है। अमेरिकी फैक्टर: राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बांग्लादेशी कपड़ों के निर्यात को ड्यूटी-फ्री सुविधा दी है, जो बांग्लादेश की अर्थव्यवस्था के लिए ‘लाइफलाइन’ है। इससे भारत के कपड़ा उद्योग के लिए भी कड़ी प्रतिस्पर्धा पैदा हो गई है। स्वतंत्र विदेश नीति: विशेषज्ञों का मानना है कि तारिक रहमान के नेतृत्व वाली नई सरकार न तो पूरी तरह भारत-विरोधी होगी और न ही चीन-समर्थक। वह किसी भी पड़ोसी को ‘विशेष दर्जा’ देने के बजाय अपने देश के हितों को प्राथमिकता देगी। निष्कर्ष: बांग्लादेश की ताकत किसी एक पक्ष (भारत या चीन) को चुनने में नहीं, बल्कि दोनों के बीच संतुलन बनाकर अपनी अहमियत बनाए रखने में है। यदि नए सुधार सफल होते हैं, तो बांग्लादेश इस क्षेत्र का एक प्रमुख रणनीतिक केंद्र बनकर उभर सकता है। FacebookShare on XLinkedInWhatsAppEmailCopy Link Post navigation बांग्लादेश चुनाव: कट्टरपंथी जमात-ए-इस्लामी की उम्मीदों पर फिरा पानी, बीएनपी (BNP) की आंधी में उड़े समीकरण पीएम मोदी ने तारिक रहमान को दी जीत की बधाई: “एक लोकतांत्रिक और समावेशी बांग्लादेश के साथ खड़ा रहेगा भारत”