नई दिल्ली:
हाल ही में ‘AI इम्पैक्ट समिट’ में एक चीनी रोबोडॉग को स्वदेशी बताकर पेश किए जाने के विवाद के बाद, अब असली स्वदेशी रोबोडॉग तकनीक और भारत की रक्षा में इसकी भूमिका पर चर्चा तेज हो गई है।

क्या है रोबोडॉग?
रोबोडॉग चार पैरों वाला एक रोबोटिक प्लेटफॉर्म है, जिसे असली कुत्तों की फुर्ती और चलने के तरीके की नकल करने के लिए बनाया गया है। ये खिलौने नहीं, बल्कि जटिल सेंसर और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से लैस मशीनें हैं, जो दुर्गम इलाकों में निगरानी, रसद पहुँचाने और खतरनाक मिशनों को अंजाम देने में सक्षम हैं।

यह कैसे काम करता है?

  1. सेंसर और धारणा: इसमें LIDAR (लेजर तकनीक), कैमरा और इन्फ्रारेड सेंसर लगे होते हैं, जो इसे 3D मैप बनाने और बाधाओं को पहचानने में मदद करते हैं।
  2. आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस: AI की मदद से यह रोबोट बिना मानवीय मदद के खुद रास्ता चुन सकता है और उबड़-खाबड़ जमीन पर अपना संतुलन बनाए रखता है।
  3. मजबूत बनावट: इसे बनाने के लिए हल्के एल्यूमीनियम और मिश्र धातुओं का उपयोग किया जाता है, ताकि यह कम बैटरी खर्च में अधिक वजन उठा सके।

भारत के लिए क्यों है अहम?

  • सैन्य शक्ति: भारतीय सेना पहले से ही MULES (Multi-Utility Legged Equipment) का परीक्षण कर रही है। ये रोबोडॉग 15 किलो तक का वजन उठाकर कठिन पहाड़ी रास्तों पर चल सकते हैं।
  • खतरों से सुरक्षा: युद्ध के मैदान या आपदा (जैसे भूकंप) के समय, जहाँ इंसानों का जाना खतरनाक है, वहाँ ये रोबोट टोह लेने और बचाव कार्य में काम आते हैं।
  • आत्मनिर्भर भारत: चीन या अन्य देशों पर निर्भर रहने के बजाय, भारत अब अपनी खुद की तकनीक विकसित कर रहा है।

मैदान में उतरीं भारतीय कंपनियाँ:
विवादों से परे, भारत की xTerra Robotics और General Autonomy जैसी कंपनियाँ शानदार काम कर रही हैं:

  • Svan-2: इसे भारत का पहला कमर्शियल क्वाड्रुपेड (चार पैरों वाला) रोबोट कहा जा रहा है।
  • PARAM: जनरल ऑटोनॉमी का यह रोबोट हाल ही में बेंगलुरु की सड़कों पर आवारा कुत्तों के साथ अपनी ‘मुठभेड़’ के कारण चर्चा में रहा था।

निष्कर्ष:
भारत अब केवल असेंबली ही नहीं, बल्कि रोबोटिक्स के मैकेनिकल डिजाइन और कंट्रोल सॉफ्टवेयर को भी स्वदेशी बना रहा है। भविष्य में ये रोबोडॉग भारतीय सीमाओं की सुरक्षा का एक मुख्य हिस्सा होंगे।


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