चेन्नई: मद्रास उच्च न्यायालय के न्यायाधीश जस्टिस जी.आर. स्वामीनाथन एक बार फिर अपने बयानों को लेकर विवादों के घेरे में हैं। तमिलनाडु में एक आध्यात्मिक संगठन के कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उन्होंने आध्यात्मिक गुरुओं और ईश्वर की शक्ति में विश्वास न करने वालों को “रास्कल (दुष्ट), मूर्ख और बर्बर” करार दिया।

विवादित बयान के मुख्य अंश

जस्टिस स्वामीनाथन ने ‘तर्कवादियों’ (Rationalists) पर निशाना साधते हुए कहा:

  • “तमिलनाडु में कुछ लोग खुद को ‘तर्कवादी’ कहते हैं। वे हमें रास्कल, मूर्ख और बर्बर कहते हैं क्योंकि हम गुरु को भगवान का रूप मानते हैं। मैं कहता हूं कि जो ऐसा कहते हैं, वे खुद रास्कल, मूर्ख और बर्बर हैं।”
  • उन्होंने आगे कहा, “मेरी सेवा के अभी चार साल बाकी हैं। मुझे लगता है कि मुझे अब और अधिक साहस के साथ आगे बढ़ना चाहिए और कार्य करना चाहिए।” Madras High Court Official

पुराने विवाद और महाभियोग (Impeachment) का सामना

जस्टिस स्वामीनाथन पहले से ही कई विवादों का केंद्र रहे हैं:

  1. थिरुपरनकुंद्रम दरगाह विवाद: उन्होंने एक ऐतिहासिक दरगाह के पास स्थित पत्थर के स्तंभ (दीपथून) पर पारंपरिक दीपक जलाने का निर्देश दिया था, जिसका राज्य सरकार ने कड़ा विरोध किया।
  2. महाभियोग प्रस्ताव: हाल ही में 100 से अधिक सांसदों ने उनके खिलाफ महाभियोग का प्रस्ताव पेश किया है। उन पर न्यायिक निष्पक्षता की कमी और धर्मनिरपेक्ष कामकाज के खिलाफ जाने का आरोप लगाया गया है।
  3. संविधान पर टिप्पणी: उन्होंने भारतीय संविधान को ‘नकल किया हुआ’ (Copied) दस्तावेज बताया था और कहा था कि अगर देश का “जनसांख्यिकीय प्रोफाइल” (Demographic Profile) बदला, तो संविधान अपनी प्रासंगिकता खो सकता है। Constitution of India

निजी आस्था बनाम न्यायिक कर्तव्य

आलोचकों का तर्क है कि जस्टिस स्वामीनाथन के सार्वजनिक बयान उनकी व्यक्तिगत आस्था और न्यायिक कर्तव्य के बीच की रेखा को धुंधला करते हैं।

  • उन्होंने एक बार कहा था, “यदि हम वेदों की रक्षा करेंगे, तो वेद हमारी रक्षा करेंगे।”
  • उन्होंने यह भी कहा था कि ‘सनातन धर्म’ उनके न्यायिक सेवा के शेष वर्षों में उनका मार्गदर्शन करेगा।

निष्कर्ष: जस्टिस स्वामीनाथन का यह ताजा बयान न्यायपालिका की ‘धर्मनिरपेक्ष’ छवि और न्यायाधीशों के सार्वजनिक आचरण पर एक नई बहस छेड़ सकता है।

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