वॉशिंगटन/इस्लामाबाद: अमेरिका के नवनिर्वाचित राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा आयोजित पहले ‘गाज़ा बोर्ड ऑफ पीस’ (Gaza Board of Peace) सम्मेलन में पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ को भारी कूटनीतिक अपमान और असहज स्थितियों का सामना करना पड़ा। जहां पाकिस्तान खुद को वैश्विक मंच पर प्रासंगिक दिखाने की कोशिश कर रहा था, वहीं पूरे कार्यक्रम के दौरान शहबाज शरीफ अकेले और दरकिनार नजर आए। 1. स्पेलिंग की गलतियां और सोशल मीडिया पर मजाक शहबाज शरीफ की यात्रा की शुरुआत ही गलतियों के साथ हुई। पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने आधिकारिक बयान में ‘United States’ को ‘Unites States of Americas’ लिख दिया। इसके बाद सोशल मीडिया पर लोगों ने उनके पुराने ‘I Condom’ (Condemn की जगह) वाले ट्वीट को याद कर खूब मजाक उड़ाया। Pakistan Foreign Ministry Office 2. फोटो सेशन में ‘बैकबेंच’ पर जगह 40 देशों के इस शिखर सम्मेलन में जब ग्रुप फोटो की बारी आई, तो 5.5 फीट के शहबाज शरीफ को पीछे की पंक्तियों में किनारे पर जगह मिली। नजारा: ट्रम्प के ठीक बगल में जेडी वेंस और मार्को रुबियो थे, जबकि सऊदी अरब और कतर के नेता प्रमुखता से आगे दिखे। तुलना: सोशल मीडिया यूजर्स ने इसकी तुलना फिल्म ‘3 इडियट्स’ के उस सीन से की जहां कम नंबर वाले छात्रों को पीछे खड़ा कर दिया जाता है। 3. “Stand Up”: ट्रम्प का आदेश और मोदी की तारीफ सम्मेलन के दौरान एक बेहद असहज पल तब आया जब ट्रम्प ने भाषण के बीच में शहबाज की ओर इशारा कर उन्हें “खड़े होने” (Stand Up) को कहा। जैसे ही शहबाज खड़े हुए, ट्रम्प ने भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपना “बेहतरीन दोस्त” और “महान व्यक्ति” बताकर उनकी तारीफ शुरू कर दी। शहबाज शरीफ चेहरे पर फीकी मुस्कान लिए खड़े रहे, जो उनके लिए किसी झटके से कम नहीं था। White House News 4. चापलूसी काम न आई शहबाज शरीफ ने ट्रम्प को ‘शांति का दूत’ (Man of Peace) और ‘दक्षिण एशिया का रक्षक’ (Saviour of South Asia) बताते हुए उनकी जमकर तारीफ की। उन्होंने यहां तक दावा किया कि पिछले साल भारत-पाक संघर्ष विराम ट्रम्प की वजह से हुआ, जबकि भारत हमेशा से कहता रहा है कि यह दोनों देशों के बीच सीधी बातचीत का नतीजा था। Ministry of External Affairs India क्यों दरकिनार हुआ पाकिस्तान? असली तनाव गाज़ा में शांति सेना (Peacekeeping Force) भेजने को लेकर है। ट्रम्प ने सेना भेजने वाले देशों (मिस्र, जॉर्डन, इंडोनेशिया आदि) का नाम लिया, लेकिन पाकिस्तान का जिक्र तक नहीं किया। पाकिस्तान की मजबूरी: पाकिस्तान, इजरायल को मान्यता नहीं देता। ऐसे में गाज़ा में इजरायली सेना के साथ समन्वय करना शहबाज सरकार के लिए घरेलू स्तर पर राजनीतिक विरोध और दंगों को न्योता देना होगा। निष्कर्ष: वॉशिंगटन दौरे ने यह साफ कर दिया कि केवल तारीफों और चापलूसी से डोनाल्ड ट्रम्प जैसे ‘ट्रान्जेक्शनल’ (लेन-देन पर भरोसा करने वाले) राष्ट्रपति को खुश नहीं किया जा सकता। पाकिस्तान की घटती कूटनीतिक अहमियत इस सम्मेलन की तस्वीरों में साफ झलक रही थी। FacebookShare on XLinkedInWhatsAppEmailCopy Link Post navigation बिरयानी के स्वाद ने पकड़ा 70,000 करोड़ का टैक्स घोटाला: जानें कैसे एक ‘प्लेट’ ने खोला देशव्यापी फर्जीवाड़े का राज Tata Punch.ev का नया अवतार लॉन्च: ₹9.69 लाख की शुरुआती कीमत और 355 KM की शानदार रेंज