चेन्नई: अगर आप इन दिनों किसी मूवी टिकट बुकिंग ऐप को खोलें, तो आप भ्रमित हो सकते हैं कि आप ‘बुकमायशो’ देख रहे हैं या ‘के टीवी’ (क्लासिक तमिल फिल्मों का चैनल)। तमिल फिल्म उद्योग इस समय एक अभूतपूर्व संकट से गुजर रहा है, जहाँ नई फिल्मों की कमी और दर्शकों की घटती संख्या ने सिनेमाघर मालिकों को पुरानी ब्लॉकबस्टर फिल्मों को दोबारा रिलीज करने पर मजबूर कर दिया है।

फरवरी-मार्च: तमिल सिनेमा के लिए ‘ब्लैक आउट’

आम तौर पर फरवरी और मार्च के महीने बोर्ड परीक्षाओं और आईपीएल (IPL) की शुरुआत के कारण सुस्त माने जाते हैं। लेकिन इस साल स्थिति ‘विनाशकारी’ रही है।

  • बड़ा झटका: थलपति विजय की बहुप्रतीक्षित फिल्म ‘जन नायगन’ (Jana Nayagan) की रिलीज में कानूनी अड़चनों के कारण अनिश्चित काल की देरी हो गई है। इसके चलते कई छोटी और मध्यम बजट की फिल्में भी अपनी रिलीज डेट तय नहीं कर पा रही हैं। Tamil Nadu Theatre Association

री-रिलीज की बाढ़: ‘घिल्ली’ से लेकर ‘वीरम’ तक

दर्शकों को सिनेमाघरों तक खींचने के लिए वितरकों ने 80, 90 और 2000 के दशक की सुपरहिट फिल्मों का सहारा लिया है:

  1. वैलेंटाइन डे स्पेशल: ‘कधलर थिनम’ (1999) और ‘उयिरुल्लावरै उषा’ (1983) जैसी रोमांटिक फिल्मों को दोबारा रिलीज किया गया।
  2. सुपरस्टार्स का जादू: विजय की ‘घिल्ली’ (अब तक की सबसे सफल री-रिलीज), अजीत की ‘वीरम’, सूर्या की ‘मौनम पेसियधे’ और विजय सेतुपति की ‘सूधु कव्वुम’ जैसी फिल्में एक बार फिर बड़े पर्दे पर लौट रही हैं। BookMyShow Chennai

क्या यह फायदे का सौदा है?

थिएटर मालिकों और विशेषज्ञों की राय इस पर बंटी हुई है:

  • तिरुपुर सुब्रमण्यन (एग्जीबिटर): उनका कहना है कि री-रिलीज से कोई ठोस राजस्व (Solid Revenue) नहीं मिल रहा है। “अगर आप 10 पुरानी फिल्में रिलीज करते हैं, तो केवल एक ही मुनाफा कमा पाती है।”
  • रमेश बाला (ट्रेड एनालिस्ट): उनके अनुसार, थिएटर मालिकों को टिकट बेचने से मतलब है, चाहे फिल्म नई हो या पुरानी। चुनाव और परीक्षाओं के कारण अप्रैल के मध्य तक यही स्थिति बनी रह सकती है। Ramesh Bala on X

निर्माताओं की चिंता: “गोल्डन गूज” को मार रहे हैं?

मशहूर निर्माता धनंजयन ने चेतावनी दी है कि हर हफ्ते इतनी सारी पुरानी फिल्में रिलीज करना इस ट्रेंड को खत्म कर सकता है। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि इससे दर्शकों में ‘थकान’ (Fatigue) पैदा होगी और यह नई छोटी फिल्मों के लिए भी खतरा है।


निष्कर्ष: साल 2026 तमिल सिनेमा के लिए ‘री-रिलीज का साल’ बनता जा रहा है। जब तक तमिलनाडु विधानसभा चुनाव संपन्न नहीं हो जाते और बड़ी फिल्में स्क्रीन पर नहीं लौटतीं, तब तक सिनेमाघरों का अस्तित्व इन्हीं ‘पुरानी यादों’ के भरोसे है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *