नई दिल्ली/हैदराबाद: भारत में बिरयानी सिर्फ एक व्यंजन नहीं, बल्कि एक भावना है। लेकिन अब इसी बिरयानी ने देश के सबसे बड़े टैक्स चोरी के रैकेट (Tax Evasion Racket) में से एक का पर्दाफाश करने में मुख्य भूमिका निभाई है। इनकम टैक्स विभाग (I-T) ने लगभग 70,000 करोड़ रुपये के टर्नओवर छिपाने के मामले में चौंकाने वाले खुलासे किए हैं।

कैसे हुआ खुलासा? (द ‘बिरयानी’ कनेक्शन)

आयकर विभाग के अधिकारियों ने जब डिजिटल बिलिंग डेटा का विश्लेषण किया, तो ‘बिरयानी बिजनेस’ से जुड़े आंकड़ों में भारी गड़बड़ी पाई गई।

  • डाटा मिसमैच: जांचकर्ताओं ने देखा कि रेस्तरां द्वारा खरीदे गए कच्चे माल (चावल और मांस) की मात्रा और घोषित की गई बिक्री के आंकड़ों में जमीन-आसमान का अंतर था।
  • डिलीवरी बनाम रिटर्न: जोमैटो और स्विगी जैसे डिलीवरी प्लेटफॉर्म्स के डेटा और जीएसटी (GST) फाइलिंग के बीच भारी अंतर मिला। जितनी बिरयानी रसोई से बाहर जा रही थी, कागजों पर उसकी आधी भी नहीं दिखाई जा रही थी।

बिरयानी ही क्यों बनी ‘मुखबिर’?

बिरयानी की लोकप्रियता और इसकी बनाने की प्रक्रिया ने इसे जांच के दायरे में ला खड़ा किया:

  1. स्टैंडर्ड रेश्यो: बिरयानी में चावल और मांस का एक तय अनुपात होता है। इससे यह अंदाजा लगाना आसान हो गया कि अगर 100 किलो चावल खरीदा गया है, तो कितनी प्लेट बिरयानी बेची गई होगी।
  2. भारी कैश फ्लो: बिरयानी आउटलेट्स पर कैश ट्रांजैक्शन और टेकअवे ऑर्डर बहुत ज्यादा होते हैं, जिसका फायदा उठाकर टर्नओवर छुपाया जा रहा था।
  3. सॉफ्टवेयर की चोरी: जांच में सामने आया कि खास ‘सॉफ्टवेयर-एनेबल्ड सप्रेशन’ (Software-enabled suppression) तकनीक का इस्तेमाल कर बिलिंग डेटा में हेरफेर किया जा रहा था।

हैदराबाद से शुरू होकर पूरे देश में फैला जाल

हैदराबाद, जो अपनी बिरयानी के लिए विश्व प्रसिद्ध है, वहां यह विसंगतियां सबसे पहले और सबसे स्पष्ट रूप से दिखाई दीं। लेकिन जांच आगे बढ़ी तो बेंगलुरु, चेन्नई और मुंबई जैसे शहरों में भी यही पैटर्न पाया गया।

अधिकारियों का पक्ष

आयकर विभाग ने स्पष्ट किया है कि यह कार्रवाई किसी विशेष समुदाय या व्यंजन के खिलाफ नहीं है। बिरयानी केवल एक “स्पॉटलाइट” की तरह काम कर रही है क्योंकि इसकी बिक्री का पैमाना इतना बड़ा है कि इसमें वित्तीय हेरफेर को छिपाना नामुमकिन हो गया। Income Tax Department Official Site


निष्कर्ष: भारत के सबसे पसंदीदा व्यंजन ने न केवल लोगों का दिल जीता, बल्कि अब जांच एजेंसियों को उन ‘डिजिटल फुटप्रिंट्स’ तक भी पहुँचा दिया है, जिन्हें टैक्स चोरों ने सालों से छिपा कर रखा था।


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