नई दिल्ली: भारत और अमेरिका के बीच अंतरिम ट्रेड डील को लेकर किसान संगठनों ने कड़ा विरोध जताया है। उनका कहना है कि इस समझौते से भारतीय किसानों के हित प्रभावित होंगे। 🗣️ किसान संगठनों का रुख संयुक्त किसान मोर्चा (SKM) ने इसे भारत सरकार का “पूर्ण आत्मसमर्पण” बताया। SKM ने वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल के तत्काल इस्तीफ़े की मांग की। उनका आरोप है कि इस डील से अमेरिकी कृषि उत्पाद भारत में सस्ते दामों पर आएंगे और भारतीय किसान प्रतिस्पर्धा में पिछड़ जाएंगे। 📌 सरकार का पक्ष वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि “संवेदनशील कृषि और डेयरी उत्पादों में भारतीय किसानों के हितों की रक्षा की गई है।” कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भी दोहराया कि प्रधानमंत्री के नेतृत्व में किसान हित सुरक्षित हैं। ⚖️ विपक्ष का आरोप कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा ने कहा कि इस डील से भारत “अमेरिका का डंपिंग ग्राउंड” बन जाएगा। उनका दावा है कि भारत को अगले 5 साल में अमेरिका से 500 अरब डॉलर का आयात करना होगा, जिससे आयात तीन गुना बढ़ जाएगा। 🌱 कपास का उदाहरण क्यों? जानकारों ने कपास का उदाहरण इसलिए दिया है क्योंकि: भारत कपास उत्पादन में अग्रणी है, लेकिन अमेरिकी कपास सस्ते दामों पर आयात होने से भारतीय किसानों को नुकसान हो सकता है। पहले भी कपास और सोयाबीन जैसे उत्पादों में अमेरिकी सब्सिडी और डंपिंग के कारण भारतीय किसानों को बाज़ार में कठिनाई हुई है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर टैरिफ़ हटाए गए तो भारतीय कपास किसानों की आय पर सीधा असर पड़ेगा। निष्कर्ष: किसान संगठन इस ट्रेड डील को किसानों के लिए खतरा मान रहे हैं, जबकि सरकार का दावा है कि किसानों के हित सुरक्षित हैं। कपास का उदाहरण यह दिखाने के लिए दिया जा रहा है कि अमेरिकी आयात भारतीय कृषि बाज़ार को कैसे प्रभावित कर सकता है। FacebookShare on XLinkedInWhatsAppEmailCopy Link Post navigation असम में एसआर को लेकर डर और चिंता प्रिंस विलियम की सऊदी यात्रा पर उठते सवाल