भारत की नज़र बांग्लादेश के संसदीय चुनावों पर इसलिए है क्योंकि इनमें जमात-ए-इस्लामी की भूमिका अहम मानी जा रही है

  • राजनीतिक पृष्ठभूमि: जमात-ए-इस्लामी पर शेख़ हसीना सरकार ने चुनाव लड़ने से प्रतिबंध लगाया था। इसके बावजूद संगठन की विचारधारा और प्रभाव बांग्लादेश की राजनीति में मौजूद है।
  • सुरक्षा और स्थिरता: भारत के लिए पड़ोसी देश में कट्टरपंथी विचारधारा वाली पार्टी का मज़बूत होना सुरक्षा चिंता का विषय है।
  • क्षेत्रीय राजनीति पर असर: जमात का उदय बांग्लादेश की आंतरिक राजनीति और समाज में ध्रुवीकरण बढ़ा सकता है, जिसका असर भारत-बांग्लादेश संबंधों पर भी पड़ सकता है।
  • आर्थिक और रणनीतिक रिश्ते: भारत और बांग्लादेश के बीच व्यापार, सीमा सुरक्षा और क्षेत्रीय सहयोग अहम हैं। जमात की मज़बूत स्थिति इन रिश्तों को प्रभावित कर सकती है।

चुनावी परिदृश्य

  • 12 फरवरी को होने वाले चुनावों में जमात की किस्मत तय होगी।
  • भारत इस पर नज़र रख रहा है क्योंकि परिणाम बांग्लादेश की राजनीतिक दिशा और भारत के साथ उसके संबंधों को प्रभावित कर सकते हैं।

👉 यह चुनाव केवल बांग्लादेश की राजनीति तक सीमित नहीं है, बल्कि दक्षिण एशिया की क्षेत्रीय स्थिरता और भारत की रणनीतिक चिंताओं से भी जुड़ा है।

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