भारत की नज़र बांग्लादेश के संसदीय चुनावों पर इसलिए है क्योंकि इनमें जमात-ए-इस्लामी की भूमिका अहम मानी जा रही है राजनीतिक पृष्ठभूमि: जमात-ए-इस्लामी पर शेख़ हसीना सरकार ने चुनाव लड़ने से प्रतिबंध लगाया था। इसके बावजूद संगठन की विचारधारा और प्रभाव बांग्लादेश की राजनीति में मौजूद है। सुरक्षा और स्थिरता: भारत के लिए पड़ोसी देश में कट्टरपंथी विचारधारा वाली पार्टी का मज़बूत होना सुरक्षा चिंता का विषय है। क्षेत्रीय राजनीति पर असर: जमात का उदय बांग्लादेश की आंतरिक राजनीति और समाज में ध्रुवीकरण बढ़ा सकता है, जिसका असर भारत-बांग्लादेश संबंधों पर भी पड़ सकता है। आर्थिक और रणनीतिक रिश्ते: भारत और बांग्लादेश के बीच व्यापार, सीमा सुरक्षा और क्षेत्रीय सहयोग अहम हैं। जमात की मज़बूत स्थिति इन रिश्तों को प्रभावित कर सकती है। चुनावी परिदृश्य 12 फरवरी को होने वाले चुनावों में जमात की किस्मत तय होगी। भारत इस पर नज़र रख रहा है क्योंकि परिणाम बांग्लादेश की राजनीतिक दिशा और भारत के साथ उसके संबंधों को प्रभावित कर सकते हैं। 👉 यह चुनाव केवल बांग्लादेश की राजनीति तक सीमित नहीं है, बल्कि दक्षिण एशिया की क्षेत्रीय स्थिरता और भारत की रणनीतिक चिंताओं से भी जुड़ा है। FacebookShare on XLinkedInWhatsAppEmailCopy Link Post navigation भारत-अमेरिका मैच को लेकर वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने एक हल्का-फुल्का मज़ाक किया। विराट कोहली के पूर्व कोच बोले—‘पाकिस्तान का बहिष्कार और फिर वापसी महज़ ड्रामा’