9 फरवरी 2026 को मुंबई में आरएसएस के 100 साल पूरे होने पर आयोजित कार्यक्रम में संघ प्रमुख मोहन भागवत ने बांग्लादेश के हिंदुओं को संबोधित करते हुए कहा कि “जितनी जल्दी वे एकजुट होंगे, उतना बेहतर होगा।”

मुख्य बातें

  • भागवत ने दावा किया कि इस बार बांग्लादेश के हिंदुओं ने मुश्किल हालात में भी न भागने का फ़ैसला किया है और वहीं रहकर लड़ने का संकल्प लिया है।
  • उन्होंने कहा कि बांग्लादेश में अब भी 1.25 करोड़ हिंदू हैं और अगर वे संगठित हो जाएं तो अपनी सुरक्षा और राजनीतिक स्थिति को मज़बूत कर सकते हैं।
  • उन्होंने भरोसा दिलाया कि भारत और दुनिया भर के हिंदू उनके समर्थन में खड़े रहेंगे।
  • भागवत ने जनसंख्या असंतुलन के कारणों में धर्मांतरण, घुसपैठ और कम जन्म दर का ज़िक्र करते हुए “तीन बच्चे पैदा करने” की बात भी कही।
  • उन्होंने विदेशी घुसपैठियों के खिलाफ सख़्त रुख़ अपनाने और मतदाता सूची संशोधन अभियान का हवाला दिया।

संदर्भ

  • बांग्लादेश में 12 फरवरी को आम चुनाव होने वाले हैं।
  • शेख़ हसीना की अवामी लीग इस बार चुनाव नहीं लड़ रही है, जिससे राजनीतिक परिदृश्य बदला हुआ है।
  • हाल के महीनों में अल्पसंख्यकों पर हमलों की घटनाओं ने भारत और अंतरराष्ट्रीय समुदाय की चिंता बढ़ाई है।
  • दिसंबर 2025 में हिंदू कपड़ा श्रमिक दीपू चंद्र दास की हत्या और छात्र नेता उस्मान हादी की मौत जैसी घटनाओं ने हालात को और गंभीर बना दिया।

भारत की चिंता

  • भारत सरकार ने कई बार बांग्लादेश की अंतरिम सरकार से अल्पसंख्यकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की अपील की है।
  • विदेश मंत्रालय के अनुसार, अंतरिम सरकार के दौरान अल्पसंख्यकों के खिलाफ 2,900 से अधिक हिंसा की घटनाएं दर्ज हुईं।
  • बांग्लादेश सरकार ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा।

👉 भागवत का यह बयान चुनावी माहौल में बांग्लादेश के हिंदुओं को एकजुट रहने का संदेश है, जिसे भारत की सुरक्षा और क्षेत्रीय राजनीति से भी जोड़ा जा रहा है।

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