बरेली: उत्तर प्रदेश पुलिस और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘मेटा’ के बीच हुए सुरक्षा समझौते ने एक बार फिर एक अनमोल जिंदगी बचा ली। बरेली में बीए प्रथम वर्ष की एक 20 वर्षीय छात्रा ने इंस्टाग्राम पर कीटनाशक की फोटो के साथ सुसाइड नोट पोस्ट किया था, जिसे देख पुलिस ने महज 16 मिनट के भीतर छात्रा के घर पहुंचकर उसे मौत के मुंह से बाहर निकाल लिया।

क्या है पूरा मामला?
यह घटना 31 अगस्त की दोपहर करीब 12:45 बजे की है। छात्रा ने इंस्टाग्राम पर गेहूं की फसल में डालने वाली कीटनाशक गोलियों की तस्वीर साझा की और आत्महत्या का संकेत देने वाला कैप्शन लिखा। जैसे ही यह पोस्ट लाइव हुई, ‘मेटा’ (Meta) के ऑटोमेटेड सिस्टम ने यूपी पुलिस के सोशल मीडिया सेंटर को तुरंत एक ईमेल अलर्ट भेजा।

पुलिस की ‘सुपरफास्ट’ कार्रवाई

  • 12:45 PM: मेटा से पुलिस को अलर्ट मिला।
  • डीजीपी का निर्देश: डीजीपी राजीव कृष्णा ने तुरंत बरेली पुलिस को लोकेशन ट्रेस करने के निर्देश दिए।
  • लोकेशन ट्रेसिंग: मोबाइल नंबर के जरिए छात्रा की लोकेशन बरेली के सीबी गंज थाना क्षेत्र में पाई गई।
  • 16 मिनट का रेस्क्यू: सूचना मिलने के मात्र 16 मिनट के भीतर सब-इंस्पेक्टर और महिला पुलिसकर्मी छात्रा के घर पहुंच गए। वहां छात्रा अर्ध-बेहोशी की हालत में मिली। उसे तुरंत प्राथमिक उपचार देकर अस्पताल पहुँचाया गया।

क्यों उठाया यह कदम?
होश में आने पर छात्रा ने बताया कि उसकी दोस्ती इंस्टाग्राम पर एक युवक से हुई थी। विवाद होने पर युवक ने उसका नंबर ब्लॉक कर दिया, जिससे वह गहरे तनाव (डिप्रेशन) में चली गई थी। उसने अपने पिता द्वारा लाए गए कीटनाशक का सेवन कर लिया था।

मेटा और यूपी पुलिस का सुरक्षा जाल
यूपी पुलिस ने साल 2022 में फेसबुक और इंस्टाग्राम की पैरेंट कंपनी ‘मेटा’ के साथ एक एमओयू (MoU) साइन किया था। इसके तहत अगर कोई व्यक्ति आत्महत्या से संबंधित सामग्री पोस्ट करता है, तो पुलिस को तत्काल रीयल-टाइम अलर्ट मिलता है। यूपी पुलिस के आंकड़ों के अनुसार, 1 जनवरी 2023 से अगस्त 2025 के बीच इस सिस्टम की मदद से 1,315 लोगों की जान बचाई जा चुकी है।

मदद के लिए संपर्क करें:
यदि आप या आपका कोई परिचित तनाव में है, तो सरकारी हेल्पलाइन नंबरों या SNEHA (044-24640050) जैसे एनजीओ से संपर्क कर सकते हैं।

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