नई दिल्ली/काराकस/वॉशिंगटन: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि भारत रूस से तेल आयात बंद कर अमेरिका और वेनेज़ुएला से तेल खरीदेगा। लेकिन ऊर्जा विशेषज्ञों का कहना है कि वेनेज़ुएला भारत की ज़रूरतों को पूरी तरह पूरा नहीं कर सकता।

📌 वेनेज़ुएला की सीमाएँ

  • एनर्जी इंटेलिजेंस रिपोर्ट के अनुसार, भारत में केवल रिलायंस इंडस्ट्रीज़ की जामनगर रिफाइनरी ही वेनेज़ुएला के भारी और जटिल कच्चे तेल को बड़े पैमाने पर रिफाइन कर सकती है।
  • बाकी भारतीय रिफाइनरियों के लिए वेनेज़ुएला का तेल तकनीकी रूप से कठिन और जोखिम भरा है।
  • वेनेज़ुएला का कच्चा तेल गुणवत्ता में कमजोर माना जाता है, इसलिए यह आमतौर पर ब्रेंट क्रूड से 13–15 डॉलर प्रति बैरल सस्ता बेचा जाता है।

⚖️ भारत-वेनेज़ुएला व्यापार का इतिहास

  • 2015 में भारत का वेनेज़ुएला से आयात 4.41 लाख बैरल प्रतिदिन तक पहुंच गया था।
  • इसमें से लगभग तीन-चौथाई रिलायंस को जाता था और बाकी नायरा एनर्जी की रिफाइनरी को, जिसे रूस की रोसनेफ्ट संचालित करती थी।
  • अमेरिकी प्रतिबंधों के बाद यह व्यापार बाधित हो गया।

🌍 विशेषज्ञों की राय

  • ऊर्जा विश्लेषक नरेंद्र तनेजा का कहना है कि वेनेज़ुएला तेल आपूर्ति के मामले में रूस की जगह नहीं ले सकता।
  • रूस भारत को स्थिर और बड़े पैमाने पर आपूर्ति करता है, जबकि वेनेज़ुएला की उत्पादन क्षमता और गुणवत्ता दोनों सीमित हैं।

निष्कर्ष: भारत के लिए वेनेज़ुएला से तेल आयात करना आंशिक विकल्प हो सकता है, लेकिन यह रूस की आपूर्ति का पूरा विकल्प नहीं बन सकता। तकनीकी चुनौतियाँ, गुणवत्ता की समस्या और अमेरिकी प्रतिबंध इसे और जटिल बना देते हैं

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *