नई दिल्ली – लोकसभा में सोमवार को बड़ा विवाद तब खड़ा हो गया जब नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने अपने भाषण की शुरुआत पूर्व सेना प्रमुख जनरल एम.एम. नरवणे की अप्रकाशित किताब से जुड़े उद्धरणों का हवाला देकर की।

विवाद की वजह

  • राहुल गांधी ने लद्दाख गतिरोध और डोकलाम मुद्दे पर नरवणे की किताब का जिक्र किया।
  • रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने तुरंत सवाल उठाया कि किताब प्रकाशित हुई है या नहीं।
  • उन्होंने कहा कि अप्रकाशित किताब के आधार पर बयान देना उचित नहीं है।
  • लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला ने भी नियम 349 का हवाला देते हुए कहा कि सदन में अखबार की कटिंग या अप्रकाशित किताबों पर चर्चा की परंपरा नहीं है।

नियम 349 क्या कहता है?

लोकसभा की कार्यवाही सुचारु रूप से चलाने के लिए कई नियम बनाए गए हैं। इनमें से एक है नियम 349

  • सदन में किसी भी चित्र, अप्रकाशित पुस्तक या अखबार का प्रदर्शन नहीं किया जा सकता।
  • सदन के काम से असंबंधित किताब, अखबार या चिट्ठी नहीं पढ़ी जा सकती।
  • किसी सदस्य के बोलते समय बीच में बाधा डालना, शोर मचाना या सीटी बजाना मना है।
  • हाउस में नारे लगाने या असंबंधित साहित्य बांटने की अनुमति नहीं है।

नतीजा

राहुल गांधी के बयान पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक हुई। विपक्ष का कहना था कि राष्ट्रीय सुरक्षा और चीन जैसे मुद्दों पर चर्चा से रोकना उचित नहीं है, जबकि सत्ता पक्ष ने इसे सदन की मर्यादा और नियमों का उल्लंघन बताया।

👉 यह घटनाक्रम दिखाता है कि संसद में नियमों और प्रक्रियाओं का पालन कितना संवेदनशील होता है, खासकर जब मामला राष्ट्रीय सुरक्षा और चीन जैसे अहम मुद्दों से जुड़ा हो।

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