सिंधु जल संधि (IWT) के अधर में होने के बीच, भारत ने जम्मू-कश्मीर में चेनाब नदी पर अपनी बड़ी जलविद्युत परियोजनाओं के काम को तेज कर दिया है। इसे लेकर पाकिस्तान ने आपत्ति जताई है, जिसे भारत ने सिरे से खारिज कर दिया है। मुख्य बातें: सवलकोट परियोजना पर जोर: भारत सरकार ने चेनाब नदी पर बनने वाली 800 मेगावाट की ‘सवलकोट जलविद्युत परियोजना’ के काम में तेजी लाने का फैसला किया है। NHPC द्वारा विकसित इस प्रोजेक्ट की अनुमानित लागत 5,129 करोड़ रुपये है। भारत का कड़ा रुख: विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि भारत के भीतर कोई भी विकास परियोजना उसकी अपनी जरूरतों और लोगों की आकांक्षाओं पर आधारित है। भारत इसे अपने “स्वयं के विवेक और समझ” के अनुसार आगे बढ़ा रहा है। सिंधु जल संधि (IWT) की स्थिति: रिपोर्ट के अनुसार, वर्तमान में यह संधि ‘निलंबित’ (Abeyance) स्थिति में है। संधि के प्रभावी रहने के दौरान चेनाब, झेलम और सिंधु पर पाकिस्तान का अधिकार था, जबकि रावी, ब्यास और सतलुज पर भारत का। अब भारत बेसिन में सवलकोट के अलावा रतले, पाकल दुल, क्वार, किरु और किरथाई जैसी कई परियोजनाओं पर तेजी से काम कर रहा है। पाकिस्तान का आरोप: पाकिस्तान ने इसे “डीवाटरिंग पॉलिसी” (पानी रोकने की नीति) करार दिया है और कहा है कि भारत अंतरराष्ट्रीय दायित्वों का उल्लंघन कर रहा है। पाकिस्तान के सिंधु जल आयुक्त ने फरवरी 2025 में भी भारत को पत्र लिखकर जानकारी मांगी थी। कानूनी स्थिति: पाकिस्तान का दावा है कि संधि अभी भी एक बाध्यकारी अंतरराष्ट्रीय दस्तावेज है, जबकि भारत अपनी विकासात्मक प्राथमिकताओं को ऊपर रख रहा है। निष्कर्ष: जम्मू-कश्मीर में बिजली उत्पादन क्षमता और जल प्रवाह प्रबंधन को मजबूत करने के लिए भारत सरकार चेनाब नदी प्रणाली पर कई बांधों का निर्माण तेज कर रही है, जो आने वाले समय में दोनों देशों के बीच कूटनीतिक तनाव का बड़ा केंद्र बन सकता है। FacebookShare on XLinkedInWhatsAppEmailCopy Link Post navigation पार्वती जी का प्रेम और तपस्या का उदाहरण भारतीय पुराणों में सबसे गहन और प्रेरणादायक प्रसंगों में से एक माना जाता है। कथा के अनुसार: रियाद से दोहा मात्र 2 घंटे में: 300 किमी/घंटा की रफ्तार वाली बुलेट ट्रेन को मिली मंजूरी