वॉशिंगटन: अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट द्वारा डोनाल्ड ट्रंप के आयात शुल्कों (Import Tariffs) को ‘अवैध’ घोषित किए जाने के बाद, अमेरिका कल से इन करों की वसूली रोकने जा रहा है। यूएस कस्टम्स एंड बॉर्डर प्रोटेक्शन (CBP) ने आधिकारिक बयान जारी कर निर्देश दिया है कि मंगलवार सुबह 12:01 बजे (भारतीय समयानुसार सुबह 10:30 बजे) से सभी संबंधित टैरिफ कोड निष्क्रिय कर दिए जाएंगे। सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला सुप्रीम कोर्ट ने 6-3 के बहुमत से यह व्यवस्था दी कि राष्ट्रपति ट्रंप ने 1977 के International Emergency Economic Powers Act (IEEPA) का इस्तेमाल कर अपनी शक्तियों का उल्लंघन किया है। कोर्ट के अनुसार, यह कानून राष्ट्रपति को इस तरह के व्यापक टैरिफ लगाने का अधिकार नहीं देता है। US Supreme Court प्रमुख बिंदु: राजस्व पर असर: रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, इस फैसले से लगभग 175 अरब डॉलर का राजस्व खतरे में है, जिसे आयातकों को वापस (Refund) करना पड़ सकता है। इन टैरिफ से रोजाना करीब 500 मिलियन डॉलर की कमाई हो रही थी। Reuters कौन से टैरिफ प्रभावित होंगे: केवल IEEPA के तहत लगाए गए शुल्क रुकेंगे। सेक्शन 232 (राष्ट्रीय सुरक्षा) और सेक्शन 301 (अनुचित व्यापार) के तहत जारी लेवी पर इसका असर नहीं पड़ेगा। प्रभावित देश: इस फैसले से चीन, दक्षिण कोरिया, जापान और ताइवान जैसे प्रमुख एशियाई देशों से होने वाले आयात को राहत मिलने की उम्मीद है। ट्रंप की नई रणनीति: 15% ग्लोबल टैरिफ अदालती झटके के तुरंत बाद, ट्रंप प्रशासन ने एक नई योजना की घोषणा की है: अब सेक्शन 122 के तहत सभी देशों से आयात पर 15% का ब्लैंकेट टैरिफ लगाया जाएगा। यह कानून राष्ट्रपति को 150 दिनों तक टैरिफ लगाने की अनुमति देता है, लेकिन उससे अधिक समय के लिए कांग्रेस की मंजूरी अनिवार्य है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस नए कदम को भी जल्द ही कानूनी चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। US Customs and Border Protection निष्कर्ष: अमेरिका की इस व्यापार नीति में बदलाव से वैश्विक सप्लाई चेन और प्रमुख व्यापारिक भागीदारों के साथ संबंधों पर गहरा असर पड़ना तय है। FacebookShare on XLinkedInWhatsAppEmailCopy Link Post navigation Tata Punch.ev का नया अवतार लॉन्च: ₹9.69 लाख की शुरुआती कीमत और 355 KM की शानदार रेंज अहमदाबाद में फिर टूटा 1 लाख दिलों का सपना: दक्षिण अफ्रीका ने भारत की नाक के नीचे कैसे रची ‘हार की साजिश’?