नई दिल्ली – केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण 1 फरवरी को वित्त वर्ष 2026-27 का बजट पेश करेंगी। इस बार बजट पर देशभर के 1.1 करोड़ केंद्रीय कर्मचारी और पेंशनर्स की खास नजर होगी, क्योंकि यह बजट 8वें वेतन आयोग के गठन के बाद आ रहा है।

क्यों अहम है यह बजट?

  • 8वें वेतन आयोग को अपनी सिफारिशें सौंपने के लिए 18 महीने का समय दिया गया है।
  • सैलरी और पेंशन में बढ़ोतरी की संभावना अगले वित्त वर्ष (FY 2027) में है, लेकिन बजट भाषण से संकेत मिल सकते हैं।
  • अगर सरकार संशोधित वेतन और पेंशन के वित्तीय बोझ को संभालने के लिए विशेष फंड का प्रावधान करती है, तो आयोग की सिफारिशें जल्दी लागू होने की अटकलें तेज हो सकती हैं।

सरकारी खजाने पर असर

  • 2017 में 7वां वेतन आयोग लागू होने पर सरकार पर ₹1.02 लाख करोड़ का बोझ पड़ा था।
  • उस समय बेसिक सैलरी और पेंशन बढ़ाने के लिए 2.57 का फिटमेंट फैक्टर इस्तेमाल किया गया था।
  • इस बार अनुमान है कि 8वें वेतन आयोग से सरकार पर ₹3 लाख करोड़ से अधिक का बोझ पड़ सकता है।

8वें वेतन आयोग में क्या होगा अलग?

  • 7वें वेतन आयोग के समय DA और DR 125% थे, जिन्हें शून्य कर दिया गया था।
  • वर्तमान में DA और DR सिर्फ 58% हैं, इसलिए वेतन में प्रभावी बढ़ोतरी ज्यादा हो सकती है।
  • कर्मचारियों और पेंशनर्स की संख्या बढ़ने से वित्तीय दबाव भी अधिक होगा।
  • कोटक इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज की रिपोर्ट (जुलाई 2025) के अनुसार, अगर फिटमेंट फैक्टर 1.8 रखा जाता है, तो सरकार पर ₹2.4 लाख करोड़ से ₹3.2 लाख करोड़ तक का बोझ पड़ सकता है।

निष्कर्ष

बजट 2026 कर्मचारियों और पेंशनर्स के लिए बेहद अहम है। भले ही वेतन और पेंशन में बढ़ोतरी तुरंत लागू होने की संभावना कम हो, लेकिन वित्त मंत्री के भाषण से 8वें वेतन आयोग की दिशा और समयसीमा को लेकर महत्वपूर्ण संकेत मिल सकते हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *