नई दिल्ली – भारतीय कमोडिटी मार्केट (MCX) में शुक्रवार को चांदी की कीमतों में अभूतपूर्व गिरावट देखने को मिली। कुछ ही घंटों में दाम करीब 25% (लगभग ₹1 लाख प्रति किलो) तक गिर गए। कल तक जो चांदी ₹4 लाख प्रति किलो के पार जा रही थी, वह अचानक नीचे आ गिरी।

गिरावट की वजह

  • अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप द्वारा केविन वॉर्श को फेडरल रिजर्व का नया चेयरमैन नामित किए जाने से ग्लोबल मार्केट में हलचल।
  • डॉलर इंडेक्स में तेज़ उछाल।
  • पिछले महीनों में चांदी की कीमतें 170% तक बढ़ चुकी थीं, जिससे बड़े निवेशकों ने मुनाफा वसूली शुरू की।
  • पैनिक सेलिंग, एल्गोरिदम ट्रेडिंग और मार्जिन कॉल्स ने बिकवाली का दबाव और बढ़ा दिया।

निवेशकों के लिए सलाह

  • लंबी अवधि के निवेशक घबराएं नहीं – इतिहास बताता है कि चांदी में बड़ी गिरावट के बाद रिकवरी भी तेज़ होती है।
  • अभी एक साथ सारा पैसा न लगाएं, बल्कि धीरे-धीरे खरीदारी करें
  • पोर्टफोलियो का केवल 5-10% हिस्सा ही सोने और चांदी में रखें।
  • बिना स्टॉप लॉस के ट्रेड न करें, क्योंकि बाजार में अभी उतार-चढ़ाव जारी रहेगा।

क्या चांदी फिर चमकेगी?

  • Citi Research और अन्य संस्थानों का मानना है कि इंडस्ट्रियल डिमांड (सोलर पैनल, EV और AI) की वजह से चांदी का भविष्य उज्ज्वल है।
  • कुछ एनालिस्ट्स ने अनुमान लगाया है कि आने वाले महीनों में अंतरराष्ट्रीय बाजार में चांदी की कीमत $150/ounce तक जा सकती है।

निष्कर्ष

चांदी की मौजूदा गिरावट निवेशकों के लिए जोखिम और अवसर दोनों लेकर आई है। अल्पकालिक अस्थिरता के बावजूद, इंडस्ट्रियल डिमांड इसे लंबी अवधि में मजबूत बना सकती है।

(डिस्क्लेमर: निवेश करने से पहले अपने वित्तीय सलाहकार से चर्चा जरूर करें। बाजार के जोखिम आपके मुनाफे और पूंजी दोनों पर असर डाल सकते हैं।)

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