नई दिल्ली, 3 फरवरी 2026 – भारत-अमेरिका ट्रेड डील के ऐलान के बाद अमेरिकी नेताओं ने इसे ऐतिहासिक करार दिया है। अमेरिकी कृषि सचिव ब्रूक रोलिंस ने दावा किया कि इस समझौते से भारत में अमेरिकी कृषि उत्पादों का निर्यात बढ़ेगा और ग्रामीण अमेरिका में नकदी का प्रवाह तेज होगा।

अमेरिकी पक्ष

  • ब्रूक रोलिंस ने कहा कि भारत की बढ़ती आबादी अमेरिकी कृषि उत्पादों के लिए बड़ा बाजार है।
  • 2024 में भारत के साथ अमेरिका का कृषि व्यापार घाटा 1.3 अरब डॉलर था।
  • उनका मानना है कि यह समझौता इस घाटे को कम करने में मदद करेगा।
  • उन्होंने व्हाइट हाउस की पोस्ट साझा करते हुए बताया कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की बातचीत में तेल व्यापार और यूक्रेन युद्ध पर भी चर्चा हुई।

भारत का जवाब

  • उच्च स्तरीय सूत्रों ने साफ किया कि कृषि और डेयरी उत्पादों पर भारत कोई समझौता नहीं करेगा।
  • मोदी सरकार ने दोहराया कि भारतीय किसानों के हित पहले जैसे ही सुरक्षित रहेंगे।
  • सरकार का रुख है कि कृषि और डेयरी सेक्टर में विदेशी दबाव के बावजूद भारतीय हितों से समझौता नहीं होगा।

समझौते की मुख्य बातें

  • भारतीय सामानों पर अमेरिकी टैरिफ 25% से घटकर 18% हो गया।
  • ट्रंप ने कहा कि यह समझौता तत्काल प्रभाव से लागू होगा।
  • पीएम मोदी ने इसे “दो बड़ी अर्थव्यवस्थाओं और लोकतंत्रों के बीच अभूतपूर्व सहयोग” बताया।

📌 निष्कर्ष: जहां अमेरिकी पक्ष इस डील को अपने किसानों के लिए फायदेमंद बता रहा है, वहीं भारत ने स्पष्ट कर दिया है कि कृषि और डेयरी सेक्टर में कोई रियायत नहीं दी जाएगी। यह समझौता मुख्य रूप से औद्योगिक और उपभोक्ता वस्तुओं पर केंद्रित है, जबकि भारतीय किसानों के हित सुरक्षित रखे गए हैं।

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