भारत ने हाल ही में यूरोपीय संघ (EU) और अमेरिका के साथ व्यापार समझौते किए हैं। इन डील्स से भारतीय निर्यातकों को नए बाजार मिले हैं और आयातित वस्तुएं सस्ती हुई हैं। इसी बीच रिपोर्ट्स में कहा गया है कि भारत और चीन के बीच व्यापार रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है। ऐसे में सवाल उठता है कि अगर भारत और चीन के बीच फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) हो जाए तो क्या होगा?

संभावित फायदे

  1. सस्ती वस्तुएं
    • चीन से आने वाले इलेक्ट्रॉनिक्स, मशीनरी, खिलौने और कपड़े और भी सस्ते हो जाएंगे।
    • भारतीय उपभोक्ताओं को रोजमर्रा की चीजों में राहत मिलेगी।
  2. निर्यात के नए अवसर
    • भारत के टेक्सटाइल, जेम्स-ज्वेलरी, फार्मा और कृषि उत्पादों को चीन के विशाल बाजार तक पहुंच मिलेगी।
    • भारतीय आईटी और सर्विस सेक्टर को भी फायदा हो सकता है।
  3. व्यापार संतुलन सुधारने का मौका
    • भारत का चीन के साथ बड़ा व्यापार घाटा है। FTA से भारतीय कंपनियों को निर्यात बढ़ाने का अवसर मिलेगा।

संभावित चुनौतियां

  1. घरेलू उद्योग पर दबाव
    • चीन से सस्ते सामान आने पर भारतीय MSMEs और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को नुकसान हो सकता है।
    • खासकर इलेक्ट्रॉनिक्स, खिलौने और स्टील सेक्टर पर असर पड़ेगा।
  2. रणनीतिक जोखिम
    • भारत और चीन के बीच राजनीतिक और सुरक्षा संबंधों में तनाव रहता है।
    • ऐसे में आर्थिक निर्भरता बढ़ना रणनीतिक दृष्टि से जोखिम भरा हो सकता है।
  3. कृषि और डेयरी सेक्टर
    • भारत पहले ही अमेरिका और EU के साथ कृषि पर समझौता करने से बच रहा है।
    • चीन के साथ FTA में भी कृषि सेक्टर को लेकर सावधानी बरतनी होगी।

निष्कर्ष

भारत-चीन FTA से उपभोक्ताओं को अल्पकालिक राहत और कुछ सेक्टरों को निर्यात का फायदा मिल सकता है, लेकिन घरेलू उद्योग और रणनीतिक हितों पर दबाव बढ़ेगा। यही कारण है कि भारत अब तक चीन के साथ FTA पर बहुत सतर्क रहा है।

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