हिमाचल प्रदेश के मनाली के पास, लगभग 6000 फीट (लगभग 1,800 मीटर) की ऊंचाई पर स्थित जगतसुख गांव के बर्फ से ढके जंगल में मोरों का एक जोड़ा देखा गया है। इस दुर्लभ नजारे ने इस नाजुक पारिस्थितिकी तंत्र पर जलवायु परिवर्तन के प्रभाव को लेकर चिंताएं बढ़ा दी हैं।
कुल्लू में नजर आया मोर
कुल्लू : हिमाचल प्रदेश में मनाली के पास 6000 फीट से अधिक ऊंचाई पर जगतसुख गांव है। यह गांव पूरी तरह बर्फ से ढका है। इसी दौरान बर्फ से ढके जंगल में मोरों का एक जोड़ा देखा गया है। इस दुर्लभ दृश्य ने इस नाजुक पारिस्थितिकी तंत्र पर जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को लेकर चिंताएं बढ़ा दी हैं। आमतौर पर मोर गर्म क्षेत्र में पाए जाते हैं। बर्फ में नजर आए इन मोरों ने जगतसुख में सनसनी मचा दी है। मौसम वैज्ञानिकों और वन्यजीव संरक्षकों ने हैरानी जताई है। वहीं गांव के कुछ लोग इस घटना को किसी अनहोनी से जोड़ रहे हैं। 52 वर्षीय बालक राम शर्मा ने कहा, ‘मैं दंग रह गया। मुझे अपनी आंखों पर विश्वास नहीं हो रहा था। हमारे जंगलों में बर्फ में दो मोर थे।’ कुछ ग्रामीणों ने उन्हें बताया कि ये जोड़े पिछले साल गर्मियों में जंगल में आए थे, लेकिन पहले बहुत कम दिखाई देते थे।
कुल्लू के उप वन संरक्षक (वन्यजीव) राजेश शर्मा ने टीओआई को बताया, ‘हमें कुछ दिन पहले ग्रामीणों से सूचना मिली थी। हमने एक मोर की जांच की और पाया कि वह घायल नहीं था और उसकी उड़ान सामान्य थी। ग्रामीणों का कहना है कि ये जोड़ा छह महीने से अधिक समय से यहां रह रहा है।’ उन्होंने कहा कि औसत तापमान में वृद्धि इस ऊंचाई पर मोरों के दुर्लभ दर्शन का एक कारण हो सकती है।

कुल्लू-मनाली के घरों में पंखे
वाइल्ड लाइफ संरक्षक ने कहा कि 10-15 साल पहले तक कुल्लू और मनाली के घरों में छत के पंखे नहीं होते थे। लेकिन अब ज्यादातर जगहों पर मौसम गर्म हो गया है और ऊंचे पहाड़ अब उतने ठंडे नहीं रहे जितने पहले थे, इसलिए मोरों को कुल्लू के ऊपरी इलाके रहने लायक लग रहे होंगे और वे वहां के वातावरण के अनुकूल ढलने लगे होंगे।

खाने की तलाश में पहुंचे मोर?
वे भोजन की तलाश में निचले इलाकों से भी पलायन कर रहे होंगे। राज्य के निचले पहाड़ी क्षेत्रों में मोरों की आबादी में वृद्धि हुई है और इन मोर का नजर आया शायद उसी का संकेत हैं। लेकिन फिलहाल कोई निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी क्योंकि अभी भी यह दर्शन दुर्लभ ही
हिमाचल प्रदेश में मोर आमतौर पर 1000 मीटर की ऊंचाई पर पाए जाते हैं, लेकिन कुछ ऊना, बिलासपुर, हमीरपुर, कांगड़ा, मंडी और सोलन जैसे 1500 मीटर तक के क्षेत्रों में भी पनपते हैं। लगभग दो साल पहले, मनाली के पास डोभी गांव के जंगलों में 2000 मीटर से अधिक की ऊंचाई पर एक मोर देखा गया था। एक और मोर कुल्लू उपमंडल के रायसन में त्रिसादी गांव के पास के जंगलों में देखा गया।

स्थानीय लोग चिंतित
त्रिसादी के 50 वर्षीय प्रेम चंद ठाकुर ने कहा कि हमने पिछले एक साल में कई बार एक मोरनी देखी है, कभी-कभी हमारे गांव के पास। मेरा अनुमान है कि यह एक जोड़ा है और आसपास के जंगलों में रहता है। यह बहुत आश्चर्यजनक है। हमें उनकी सुरक्षा की चिंता है क्योंकि गांव में कुत्ते हैं। यहां तक कि ‘लाल जंगली मुर्गा’, जो राज्य के गर्म क्षेत्रों में 300 मीटर से 1,500 मीटर की ऊंचाई पर पाया जाता है, उसे भी लगभग 2,000 मीटर की ऊंचाई पर देखा गया है। कुछ लोगों ने चर्चा शुरू कर दी है कि यह प्रलय आने का संकेत है।

हिमाचल प्रदेश का तापमान बढ़ा
पिछले 124 वर्षों में हिमाचल प्रदेश का तापमान काफी बढ़ गया है। मौसम विभाग के अनुसार, राज्य में 1901 से औसत तापमान में 1.5 डिग्री सेल्सियस की वृद्धि दर्ज की गई है। आईएमडी के आंकड़ों के मुताबिक, औसत अधिकतम तापमान में 2.18 डिग्री की वृद्धि हुई है, जबकि न्यूनतम तापमान में 0.84 डिग्री सेल्सियस की वृद्धि हुई है।

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