नौगांव (असम): स्पेशल रिवीज़न (SR) प्रक्रिया के नोटिस मिलने के बाद कई परिवारों में नागरिकता को लेकर गहरी चिंता है।

📌 फ़ाज़िला ख़ातून का अनुभव

  • 50 वर्षीय फ़ाज़िला ख़ातून, जिनका घर अतिक्रमण हटाओ अभियान में तोड़ा गया था, अब वोटर लिस्ट से नाम कटने के डर से परेशान हैं।
  • वह कहती हैं: “अगर वोटर लिस्ट से नाम कट गया तो हमारी नागरिकता ख़त्म हो जाएगी। मकान तोड़ दिए गए, अब अगर नागरिकता नहीं रही तो कहां जाएंगे?”
  • फ़ाज़िला और उनके बेटे कई बार अधिकारियों के सामने दस्तावेज़ पेश कर चुके हैं, लेकिन डर अब भी बना हुआ है।

⚖️ पृष्ठभूमि

  • नौगांव ज़िले के चानखुला क्षेत्र में लगभग 331 परिवार खुले मैदान में प्लास्टिक की झुग्गियों में रह रहे हैं।
  • ये परिवार पहले लुटुमारी रिज़र्व फ़ॉरेस्ट में बसे थे।
  • 29 नवंबर 2025 से शुरू हुए अतिक्रमण हटाओ अभियान में लगभग 6,000 बीघा (798 हेक्टेयर) ज़मीन खाली कराई गई थी।

✨ चिंता का कारण

  • लोगों को डर है कि वोटर लिस्ट से नाम कटने पर उनकी नागरिकता पर सवाल उठ जाएगा।
  • कई परिवार लगातार सुनवाई और दस्तावेज़ पेश करने के बावजूद असमंजस में हैं।

यह स्थिति दिखाती है कि असम में नागरिकता और वोटर लिस्ट से जुड़े मुद्दे कितने संवेदनशील हैं। अतिक्रमण हटाओ अभियान के बाद विस्थापित परिवार अब नागरिकता को लेकर असुरक्षा महसूस कर रहे हैं।

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