27 जनवरी 2026 को नई दिल्ली में भारत और यूरोपीय संघ (EU) के बीच एक ऐतिहासिक मुक्त व्यापार समझौते (FTA) पर हस्ताक्षर किए गए। 20 साल की लंबी बातचीत के बाद हुई इस ‘मदर ऑफ ऑल डील्स’ ने पाकिस्तान के व्यापारिक गलियारों में हड़कंप मचा दिया है।

पाकिस्तान की चिंता के मुख्य कारण:

  • खत्म हुई ‘जीरो-ड्यूटी’ की बढ़त: अब तक पाकिस्तान को ‘GSP+’ स्टेटस के कारण यूरोपीय बाजार में अपने 66% उत्पादों (विशेषकर कपड़ों और टेक्सटाइल) पर शून्य शुल्क की सुविधा मिलती थी। वहीं भारतीय निर्यातकों को 9% से 12% तक टैक्स देना पड़ता था। अब भारत को भी ड्यूटी-फ्री एक्सेस मिल गया है, जिससे पाकिस्तान की प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त खत्म हो गई है।
  • दोहरी मार (Double Blow): पाकिस्तान का वर्तमान GSP+ स्टेटस दिसंबर 2027 में समाप्त होने वाला है। यदि इसे रिन्यू नहीं किया गया, तो पाकिस्तान के लिए यूरोपीय बाजार में टिकना लगभग नामुमकिन हो जाएगा।
  • रोजगार पर संकट: पाकिस्तान के पूर्व वाणिज्य मंत्री डॉ. गोहर एजाज ने चेतावनी दी है कि पाकिस्तान का “जीरो-टैरिफ हनीमून” खत्म हो चुका है और इस वजह से 10 मिलियन (1 करोड़) नौकरियां खतरे में हैं।
  • भारतीय उत्पादों की पहुंच: इस समझौते के लागू होने के बाद, भारत के लगभग 95% ‘श्रम-प्रधान’ (labour-intensive) निर्यात को यूरोपीय संघ में शुल्क मुक्त प्रवेश मिलेगा। बदले में, यूरोपीय देशों से आने वाली लग्जरी कारें और वाइन भारत में सस्ती हो जाएंगी।

पाकिस्तान की प्रतिक्रिया:

पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ताहिर अंद्राबी ने कहा है कि वे इस प्रभाव से निपटने के लिए ब्रसेल्स (EU मुख्यालय) और यूरोपीय देशों के साथ लगातार संपर्क में हैं। पाकिस्तान के उद्योगपतियों का कहना है कि एक बार यूरोपीय बाजार हाथ से निकल गया, तो उसे वापस पाना बेहद मुश्किल होगा।

निष्कर्ष: यह समझौता न केवल भारत की अर्थव्यवस्था को गति देगा, बल्कि दक्षिण एशिया के व्यापारिक समीकरणों को भी पूरी तरह बदल देगा। भारत अब यूरोपीय बाजार में पाकिस्तान और वियतनाम जैसे देशों को कड़ी टक्कर देने के लिए तैयार है।

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