नई दिल्ली: वर्षों से एक ही कंपनी में टिके रहने को ‘स्मार्ट मूव’ माना जाता था, लेकिन आज की बदलती इकोनॉमी में यह आपकी जेब पर भारी पड़ सकता है। भारत में अब “न्यू हायर प्रीमियम” (New Hire Premium) का चलन बढ़ गया है, जहाँ कंपनियाँ नए जुड़ने वाले कर्मचारियों को पुराने और वफादार कर्मचारियों की तुलना में काफी अधिक वेतन (Salary) दे रही हैं।

मुख्य आंकड़े और रुझान:

  • सैलरी गैप: जॉबबज़ (JobBuzz) के सर्वे के अनुसार, 90% कर्मचारी मानते हैं कि एक ही लेवल पर काम करने वालों के वेतन में अंतर है। इनमें से 40% का कहना है कि बाहरी उम्मीदवारों को ज्यादा पैसे मिलते हैं।
  • इंक्रीमेंट बनाम स्विच: जहाँ सालाना इंक्रीमेंट औसतन 8-10% रहता है, वहीं नौकरी बदलने (Switch) पर प्रोफेशनल्स को 20-40% तक की जंप मिल रही है।
  • असंतुष्टि: foundit (पूर्व में मोंस्टर) के सर्वे के मुताबिक, 47% भारतीय प्रोफेशनल्स अपने वेतन वृद्धि से खुश नहीं हैं और 40% का मानना है कि उनका वेतन इंडस्ट्री स्टैंडर्ड से कम है।

कंपनियाँ नए लोगों को ज्यादा पैसे क्यों देती हैं?

  1. मार्केट डिमांड: नए कर्मचारियों को वर्तमान मार्केट रेट के हिसाब से भुगतान किया जाता है, जबकि पुराने कर्मचारी सालाना बजट और अप्रेजल साइकिल में बंधे होते हैं।
  2. स्किल की कमी: AI, डेटा एनालिटिक्स और साइबर सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में टैलेंट की कमी है। इन पदों को भरने के लिए कंपनियाँ तुरंत मोटी रकम देने को तैयार रहती हैं।
  3. नेगोशिएशन पावर: नए उम्मीदवार के पास कई ऑफर होते हैं, जिससे उनके पास मोलभाव (Negotiation) की ताकत होती है।

मनोवैज्ञानिक बदलाव:

संगठनात्मक मनोवैज्ञानिकों का कहना है कि अब प्रोफेशनल्स ‘करियर मोबिलिटी’ को वित्तीय रणनीति (Financial Strategy) के रूप में देखते हैं, न कि बेवफाई के रूप में। बेंगलुरु और अन्य शहरों के आईटी हब में यह स्थिति आम है, जहाँ लोग अपने जूनियर को खुद से 30% ज्यादा कमाते हुए देख रहे हैं।

कंपनियों के लिए जोखिम:

विशेषज्ञों की चेतावनी है कि अगर वफादार कर्मचारियों के वेतन में सुधार नहीं किया गया, तो न केवल वे कंपनी छोड़ देंगे, बल्कि उनके मनोबल में गिरावट से उत्पादकता भी घटेगी। एक कर्मचारी का जाना और उसकी जगह नए को ज्यादा पैसे पर लाना कंपनी के लिए और भी महंगा साबित होता है।

निष्कर्ष: आज के दौर में वफादारी का भावनात्मक महत्व तो है, लेकिन वित्तीय रूप से सवाल अब यह है— “क्या यहाँ रुकना मुझे महंगा पड़ रहा है?”


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