नई दिल्ली: केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने भारत द्वारा अमेरिका और यूरोपीय संघ के साथ किए गए हालिया व्यापार समझौतों को भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए एक “नया युग” बताया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि ये सौदे किसी मजबूरी में नहीं, बल्कि भारत की बढ़ती ताकत और आत्मविश्वास के साथ किए गए हैं।

साक्षात्कार की मुख्य बातें:

  1. राष्ट्रीय हितों की सुरक्षा: पीयूष गोयल ने जोर देकर कहा कि इन समझौतों में डेयरी (Dairy) और संवेदनशील कृषि क्षेत्रों के साथ कोई समझौता नहीं किया गया है। उन्होंने कहा, “हमने स्विट्जरलैंड और ईयू को स्पष्ट कर दिया कि हम अपने छोटे पशुपालकों और किसानों के हितों की रक्षा करेंगे।”
  2. अमेरिकी डील और कृषि: उन्होंने कृषि क्षेत्र में समझौतों के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि अमेरिका से बेहतर गुणवत्ता वाले सेब या अन्य फलों के आयात से भारतीय उपभोक्ताओं को अधिक विकल्प मिलेंगे, लेकिन सोयाबीन जैसे संवेदनशील उत्पादों पर सुरक्षा बरकरार है।
  3. H-1B वीजा और GCC का बढ़ता प्रभाव: वीजा प्रतिबंधों पर चिंता को दूर करते हुए गोयल ने कहा कि अब भारतीयों को न्यूयॉर्क या टोक्यो जाने की जरूरत नहीं है। भारत में 1800 से अधिक ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर (GCC) खुल चुके हैं, जिससे भारतीय युवा अपने घर में रहकर विदेशी कंपनियों के लिए काम कर रहे हैं और भारत की अर्थव्यवस्था में योगदान दे रहे हैं।

आम आदमी और रोजगार पर क्या होगा असर?

पीयूष गोयल के अनुसार, ये व्यापार सौदे सीधे तौर पर आम भारतीयों को फायदा पहुँचाएंगे:

  • करोड़ों नए रोजगार: टेक्सटाइल, परिधान, जूते, चमड़ा उद्योग, हस्तशिल्प और हथकरघा जैसे श्रम-प्रधान क्षेत्रों को भारी प्रोत्साहन मिलेगा। मंत्री ने कहा कि यदि निर्यातक इस अवसर का लाभ उठाते हैं, तो लाखों-करोड़ों नौकरियां पैदा होंगी।
  • सस्ते और बेहतर उत्पाद: वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला से जुड़ने के कारण भारतीय उपभोक्ताओं को उच्च तकनीक (जैसे एनवीडिया चिप्स) और बेहतर गुणवत्ता वाले उत्पाद आसानी से उपलब्ध होंगे।
  • स्टार्टअप्स के लिए निवेश: ये सौदे भारतीय स्टार्टअप्स के लिए विदेशी निवेश के रास्ते खोलेंगे और व्यापार में स्थिरता और पारदर्शिता लाएंगे।

2047 तक विकसित भारत का लक्ष्य:

मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी का विजन भारत को 2047 तक 30 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था और एक विकसित राष्ट्र बनाना है। उन्होंने इसे ’30-30-30 की शक्ति’ (30 साल से कम उम्र के युवाओं की आबादी जो अगले 30 साल तक 30 ट्रिलियन इकोनॉमी की ओर ले जाएगी) करार दिया।

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