उदयपुर: राजस्थान के सबसे प्रतिष्ठित और ऐतिहासिक मेवाड़ राजघराने में पैतृक संपत्तियों के बंटवारे का विवाद एक बार फिर सुर्खियों में है। पिछले साल राजघराने के ‘अभिरक्षक’ (Custodian) महाराणा अरविंद सिंह के निधन के बाद, उनके उत्तराधिकारी लक्ष्यराज सिंह मेवाड़ और उनकी बहनों के बीच कानूनी रस्साकशी तेज हो गई है।

विवाद की मुख्य वजह:

  • वसीयत पर सवाल: 41 वर्षीय लक्ष्यराज सिंह मेवाड़ अपने दिवंगत पिता अरविंद सिंह की वसीयत को लेकर अपनी ही बहनों के साथ कानूनी विवाद में उलझे हुए हैं।
  • 40 साल पुराना मामला: यह संपत्ति विवाद पिछले चार दशकों से चला आ रहा है, जिसने परिवार के रिश्तों में गहरी दरार डाल दी है। दिल्ली हाई कोर्ट इस मामले में जल्द ही अपना फैसला सुना सकता है।

संपत्ति का महत्व:

मेवाड़ राजघराने की इस पैतृक संपत्ति में उदयपुर का प्रसिद्ध सिटी पैलेस, कई आलीशान होटल और ऐतिहासिक इमारतें शामिल हैं। यह न केवल एक परिवार की विरासत है, बल्कि राजस्थान की अर्थव्यवस्था और पर्यटन के लिहाज से भी बेहद महत्वपूर्ण है।

पृष्ठभूमि:

मेवाड़ परिवार में लंबे समय से दो गुट रहे हैं—एक अरविंद सिंह का परिवार और दूसरा उनके बड़े भाई महेंद्र सिंह मेवाड़ (जिनका हाल ही में निधन हुआ) का परिवार। अब अरविंद सिंह के निधन के बाद उनके अपने बच्चों के बीच वसीयत को लेकर शुरू हुई यह जंग इस शाही गाथा में एक नया मोड़ ले आई है।

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