मुख्य सुर्खियां:

  • Zoho प्रमुख श्रीधर वेंबू की चेतावनी: “ब्रेन ड्रेन भारत को बहुत महंगा पड़ रहा है।”
  • व्हाइट हाउस सलाहकार श्रीराम कृष्णन के बयान पर पलटवार– ‘अपनी प्रतिभा बचाने के लिए लड़ना होगा भारत को’
  • एआई (AI) की जंग: क्या भारत अमेरिकी तकनीक पर निर्भर रहेगा? वेंबू ने जताई बड़ी चिंता।
  • सॉवरेन एआई समिट के बीच छिड़ी बहस: ‘अगली पीढ़ी को भारत में रोकना सबसे बड़ी चुनौती।’

विस्तृत समाचार रिपोर्ट:

नई दिल्ली: प्रतिभा पलायन और तकनीकी संप्रभुता का संकट

नई दिल्ली में आयोजित ‘इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट’ (India AI Impact Summit) के दौरान जोहो (Zoho) के संस्थापक श्रीधर वेंबू ने भारत की सबसे दुखती रग ‘ब्रेन ड्रेन’ पर उंगली उठाई है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर व्हाइट हाउस के सलाहकार श्रीराम कृष्णन का एक वीडियो साझा करते हुए देश को अपनी बेहतरीन प्रतिभाओं को संजोने की सलाह दी है।

क्या है पूरा विवाद?
वीडियो में भारतीय मूल के अमेरिकी सलाहकार श्रीराम कृष्णन कह रहे हैं कि अमेरिका चाहता है कि भारत सहित उसके सभी सहयोगी देश अमेरिकी एआई (AI) मॉडल और इंफ्रास्ट्रक्चर का उपयोग करें। इस पर कटाक्ष करते हुए श्रीधर वेंबू ने लिखा, “यही कारण है कि ब्रेन ड्रेन (प्रतिभा का विदेश जाना) महंगा पड़ता है।” उनका इशारा इस ओर था कि भारत की टॉप टैलेंट (जैसे श्रीराम कृष्णन) विदेश जाकर दूसरे देशों की तकनीकी शक्ति बढ़ा रहे हैं, जिससे भारत की अपनी ‘स्वदेशी तकनीक’ के विकास पर बुरा असर पड़ता है।

अगली पीढ़ी को रोकने की अपील
वेंबू ने जोर देकर कहा कि भारत को अपनी अगली पीढ़ी की प्रतिभा को देश में ही बनाए रखने के लिए “कड़ी लड़ाई” लड़नी होगी। उन्होंने पहले भी भारत के अपने ऑपरेटिंग सिस्टम और घरेलू तकनीक विकसित करने के लिए एक बड़े राष्ट्रीय मिशन की वकालत की है।

ब्रेन ड्रेन के चौंकाने वाले आंकड़े
नीति आयोग और हालिया आंकड़ों के अनुसार, भारत में उच्च शिक्षा के लिए आने वाले हर एक विदेशी छात्र के मुकाबले 25 भारतीय छात्र विदेश जा रहे हैं। साल 2024 में ही करीब 13.36 लाख छात्र पढ़ाई के लिए विदेश गए थे। वेंबू का मानना है कि जब तक भारत अपनी प्रतिभाओं को रोकने में सफल नहीं होता, वह तकनीकी रूप से दूसरे देशों पर निर्भर रहेगा।

निष्कर्ष:
श्रीधर वेंबू का यह बयान ऐसे समय आया है जब भारत दुनिया में एआई की महाशक्ति बनने की रेस में है। उनका तर्क साफ है—अगर भारत को दुनिया का नेतृत्व करना है, तो उसे अपनी ‘ब्रेन पावर’ को विदेश जाने से रोकना होगा।

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