एक्सेल शीट से रिश्तों का ROI ट्रैक, इंटरनेट पर छिड़ी बहस बेंगलुरु। एक टेक प्रोफेशनल पंकज ने सोशल मीडिया पर खुलासा किया कि वह पिछले छह साल से अपनी दोस्तियों को एक कस्टम सिस्टम Ziya के जरिए ट्रैक कर रहे हैं। यह सिस्टम किसी पर्सनल CRM की तरह काम करता है, जिसमें बातचीत, इंटरैक्शन पैटर्न और बातचीत के बाद की भावनाओं तक को लॉग किया जाता है। पंकज का तर्क “मैं दोस्ती को क्वांटिफाई करता हूं। अगर किसी का ROI लंबे समय तक निगेटिव रहता है, तो मैं बातचीत बंद कर देता हूं।” उनका कहना है कि नई दोस्ती बनाने में भारी “बूटअप कॉस्ट” लगती है: 8–12 घंटे: पहली बातचीत से असली कनेक्शन तक 45–60 घंटे: भरोसा बनाने में 80–120 घंटे: भावनात्मक जुड़ाव तक कुल मिलाकर एक गहरी दोस्ती बनाने में 128–192 घंटे लगते हैं। मेंटेनेंस के लिए हर साल 45–65 घंटे देने पड़ते हैं। आंकड़े और निष्कर्ष 2019 से 2025 के बीच उन्होंने छह नई दोस्ती बनाने की कोशिश की, जिसमें लगभग 354 घंटे लगे, लेकिन वे रिश्ते “सिर्फ नाम” बनकर रह गए। उनका दावा है कि 25 साल की उम्र के बाद बनी नई दोस्तियों के 72–73% दो साल में टूटने की संभावना होती है। फिलहाल उनके पास 8–12 साल पुराने चार करीबी दोस्त हैं, जिन पर वे हर साल लगभग 400 घंटे खर्च करते हैं। इंटरनेट पर प्रतिक्रिया कुछ लोगों ने इसे “डिस्टोपियन” कहा, तो कुछ ने इसे “रिलेटेबल” पाया। यह बहस दिखाती है कि आज के दौर में दोस्ती भी डेटा और एनालिसिस के नजरिए से देखी जा सकती है। 👉 संक्षेप में: पंकज का यह प्रयोग दोस्ती को समय और भावनात्मक निवेश के हिसाब से मापने की कोशिश है। इससे यह सवाल उठता है कि क्या रिश्तों को भी ROI और डेटा पॉइंट्स में बांधा जा सकता है, या यह मानवीय जुड़ाव की गर्माहट को ठंडा कर देता है। FacebookShare on XLinkedInWhatsAppEmailCopy Link Post navigation टी20 वर्ल्ड कप 2026: ‘धुरंधर’ अंदाज़ नहीं, एंकर रोल में लौटी टीम इंडिया नासा का आर्टेमिस-II रॉकेट ‘टैंकिंग फेज़’ में