बरेली: उत्तर प्रदेश के बरेली में पुलिस ने एक बड़े धर्मांतरण रैकेट का भंडाफोड़ किया है। यह गिरोह भोली-भाली जनता और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को डरा-धमकाकर या पैसों का लालच देकर इस्लाम में परिवर्तित कराने का काम कर रहा था। इस मामले की तुलना चर्चित ‘छंगुर बाबा’ केस से की जा रही है।

गायब प्रोफेसर की तलाश में खुला राज
इस गिरोह का खुलासा तब हुआ जब अलीगढ़ की अखिलेश कुमारी ने अपने दृष्टिबाधित (Blind) बेटे प्रभात उपाध्याय की गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई। प्रभात, जिन्होंने हैदराबाद यूनिवर्सिटी से पीएचडी की है और सरकारी कॉलेज में प्रोफेसर हैं, को शादी का झांसा देकर बरेली के एक मदरसे में लाया गया था। पुलिस ने मदरसे पर छापेमारी कर ऐन वक्त पर प्रभात का धर्मांतरण रुकवाया, उन्हें ‘हामिद’ नाम दिया जाने वाला था।

गिरफ्तार आरोपी और मास्टरमाइंड
पुलिस ने इस मामले में 4 लोगों को गिरफ्तार किया है:

  1. अब्दुल मजीद (मदरसे का मौलवी और गिरोह का मास्टरमाइंड)
  2. सलमान
  3. आरिफ
  4. फहीम

एक ही परिवार के तीन सदस्यों का धर्मांतरण
जांच में सामने आया कि इस गिरोह ने सुभाष नगर के बृजपाल साहू के परिवार को सालों पहले निशाना बनाया था। बृजपाल को ‘अब्दुल्ला’ बनाया गया, जिसके बाद उसकी मां को ‘अमीना’ और बहन को ‘आयशा’ में परिवर्तित कर दिया गया। परिवार को जमीन और आर्थिक मदद का लालच दिया गया था। विरोध करने पर परिवार के खिलाफ छेड़खानी के झूठे मुकदमे भी दर्ज कराए गए थे।

जांच में बड़े खुलासे:

  • आपत्तिजनक सामग्री: मदरसे से जाकिर नाइक के भाषणों की सीडी, धार्मिक साहित्य और धर्मांतरण के प्रमाण पत्र बरामद हुए हैं।
  • विदेशी फंडिंग का शक: मास्टरमाइंड अब्दुल मजीद के पास से सैकड़ों वित्तीय लेन-देन के दस्तावेज मिले हैं। बरेली पुलिस इस बात की जांच कर रही है कि इन गतिविधियों के लिए फंड कहां से आ रहा था।
  • नेटवर्क: एसपी (दक्षिण) अंशिका वर्मा के अनुसार, इस गिरोह का जाल बरेली के अलावा अन्य जिलों और राज्यों में भी फैला हुआ है।

पुलिस अब उन बैंक खातों की पड़ताल कर रही है जिनमें दान के नाम पर बड़ी रकम जमा की गई थी।

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