कोलकाता: बंगाल की राजनीति में ‘चाणक्य’ के नाम से मशहूर और तृणमूल कांग्रेस (TMC) के पूर्व राष्ट्रीय महासचिव मुकुल रॉय का रविवार तड़के 1:30 बजे कोलकाता के अपोलो अस्पताल में निधन हो गया। उनके बेटे सुभ्रांशु रॉय ने पुष्टि की कि 71 वर्षीय नेता की मृत्यु कार्डियक अरेस्ट (दिल का दौरा) के कारण हुई। वह पिछले कुछ समय से डिमेंशिया (स्मृति लोप) और अन्य गंभीर बीमारियों से जूझ रहे थे।

राजनीतिक सफर: ममता के ‘नंबर 2’ से भाजपा के ‘शिल्पी’ तक

मुकुल रॉय का राजनीतिक करियर उतार-चढ़ाव से भरा रहा:

  • TMC की स्थापना: 1998 में ममता बनर्जी के साथ मिलकर तृणमूल कांग्रेस की नींव रखने वाले मुकुल रॉय लंबे समय तक पार्टी में दूसरे सबसे शक्तिशाली नेता माने जाते थे।
  • केंद्र में भूमिका: उन्होंने यूपीए-2 सरकार में जहाजरानी राज्य मंत्री और मार्च से सितंबर 2012 तक केंद्रीय रेल मंत्री के रूप में सेवाएं दीं। Indian Railways Official
  • भाजपा में शामिल होना: शारदा और नारद जैसे घोटालों में नाम आने और ममता बनर्जी से मतभेदों के बाद 2015 में उन्हें महासचिव पद से हटा दिया गया। 2017 में वह भाजपा में शामिल हो गए और 2019 के लोकसभा चुनावों में बंगाल में भाजपा की 18 सीटें जिताने में अहम भूमिका निभाई।

घर वापसी और गिरता स्वास्थ्य

2021 के विधानसभा चुनाव के बाद मुकुल रॉय फिर से ममता बनर्जी की मौजूदगी में टीएमसी में शामिल हो गए। ममता ने तब कहा था, “मुकुल हमारे परिवार का पुराना लड़का है, ओल्ड इज गोल्ड।” हालांकि, खराब स्वास्थ्य के कारण उनकी दूसरी पारी शांत रही। 2025 में कलकत्ता हाईकोर्ट ने दलबदल कानून के तहत उनकी विधानसभा सदस्यता रद्द कर दी थी। Calcutta High Court

दिग्गजों ने दी श्रद्धांजलि

  • पीएम नरेंद्र मोदी: प्रधानमंत्री ने शोक व्यक्त करते हुए कहा कि रॉय को उनके राजनीतिक अनुभव और समाज सेवा के प्रयासों के लिए याद किया जाएगा। Prime Minister’s Office
  • अभिषेक बनर्जी: टीएमसी सांसद ने इसे “एक युग का अंत” बताया और पार्टी के विस्तार में उनके योगदान को सराहा।

अंतिम संस्कार: मुकुल रॉय का पार्थिव शरीर सोमवार को उनके निवास स्थान ले जाया जाएगा, जहां उनका अंतिम संस्कार संपन्न होगा।


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