नई दिल्ली: पश्चिम एशिया में युद्ध के मंडराते बादलों और ईरान-अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव ने वैश्विक अर्थव्यवस्था के साथ-साथ भारतीय बाजारों में भी चिंता बढ़ा दी है। हालांकि भारत सीधे तौर पर ईरान से तेल का आयात नहीं करता, लेकिन वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों में संभावित बढ़ोत्तरी का असर भारत के कई प्रमुख सेक्टरों पर पड़ना तय है।

मुख्य आर्थिक प्रभाव:

  • कच्चे तेल की कीमतों में उछाल: विश्लेषकों का अनुमान है कि यदि अमेरिका ईरान पर हमला करता है, तो ब्रेंट क्रूड की कीमतें $90 प्रति बैरल के पार जा सकती हैं। 23 फरवरी 2026 को कच्चा तेल $72 के करीब ट्रेड कर रहा था। Bloomberg के अनुसार, यदि आपूर्ति बाधित रही, तो 2026 की चौथी तिमाही तक औसत कीमत $91 तक पहुँच सकती है।
  • भारत का आयात बिल: भारत अपनी तेल जरूरतों का 85% आयात करता है। कच्चे तेल की कीमत में $1 की वृद्धि होने पर भारत का वार्षिक आयात बिल लगभग $1 बिलियन (करीब ₹8,300 करोड़) बढ़ जाता है।
  • रूसी तेल का कम होता लाभ: अमेरिका के दबाव के चलते भारत अब रूस से मिलने वाले रियायती (Discounted) तेल पर निर्भरता कम कर रहा है। वित्त वर्ष 2026 की पहली छमाही में रूस से तेल आयात में 14% की गिरावट आई है। Crisil

इन क्षेत्रों (Sectors) पर पड़ेगा सबसे ज्यादा असर:

  1. पेंट और स्पेशलिटी केमिकल्स: ये उद्योग कच्चे तेल के डेरिवेटिव्स को कच्चे माल के रूप में उपयोग करते हैं। लागत बढ़ने से इन कंपनियों के मुनाफे पर सीधा असर पड़ेगा।
  2. विमानन (Aviation): हवाई ईंधन (ATF) महंगा होने से एयरलाइंस की परिचालन लागत बढ़ेगी, जिससे हवाई किराए महंगे हो सकते हैं।
  3. सिंथेटिक टेक्सटाइल और प्लास्टिक: पेट्रोकेमिकल आधारित उत्पादों की कीमतें बढ़ने से कपड़ा और पैकेजिंग उद्योग प्रभावित होंगे।
  4. लॉजिस्टिक्स और ट्रांसपोर्ट: ईंधन की बढ़ती कीमतें माल ढुलाई को महंगा कर देंगी, जिससे आम आदमी के लिए आवश्यक वस्तुओं की कीमतें बढ़ सकती हैं।

व्यापार और कृषि पर प्रभाव:

  • बासमती चावल: ईरान भारतीय बासमती चावल का तीसरा सबसे बड़ा खरीदार (करीब 13%) है। युद्ध की स्थिति में सप्लाई चेन और भुगतान (Payments) में देरी होने से निर्यातकों का वर्किंग कैपिटल फंस सकता है। Hindustan Times
  • मेवे और फल: भारत के कुल मेवे और फल आयात का 10% हिस्सा ईरान से आता है, जिसकी आपूर्ति बाधित हो सकती है।

ताजा स्थिति: भारतीय दूतावास ने 23 फरवरी 2026 को ईरान में रह रहे भारतीय नागरिकों को सुरक्षा के मद्देनजर देश छोड़ने की सलाह दी है।

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