पेंसिल्वेनिया: पेंसिल्वेनिया स्टेट यूनिवर्सिटी के मौसम विज्ञानी पैट्रिक मैकफारलैंड के नेतृत्व में शोधकर्ताओं की एक टीम ने पहली बार जंगली पेड़ों की पत्तियों से निकलने वाले धुंधले विद्युत विसर्जन (Electrical Discharges) को रिकॉर्ड किया है। यह अध्ययन ‘जियोफिजिकल रिसर्च लेटर्स’ (Geophysical Research Letters) पत्रिका में प्रकाशित हुआ है।

यह कैसे काम करता है?

  • सिद्धांत: जब आसमान में तूफान बनता है, तो वह एक शक्तिशाली विद्युत क्षेत्र (Electric Field) बनाता है। यह जमीन में एक विपरीत चार्ज पैदा करता है, जो ऊंचे स्थानों (जैसे पेड़ों की फुनगी या पत्तियों की नोक) की ओर बढ़ता है।
  • चमक: पत्तियों की नोक पर पहुँचकर यह चार्ज एक हल्की नीली रोशनी के रूप में निकलता है, जिसे ‘कोरोना’ कहा जाता है। प्रयोगशाला में यह रोशनी अंधेरे में नीली दिखाई देती है, लेकिन प्रकृति में इसे देखना लगभग असंभव था। Geophysical Research Letters

कैसे पकड़ी गई यह दुर्लभ चमक?

  • तूफान का पीछा: वैज्ञानिकों ने एक 2013 मॉडल की टोयोटा सिएना कार को ‘मोबाइल लैब’ में बदल दिया। इसमें इलेक्ट्रिक फील्ड डिटेक्टर, लेजर रेंजफाइंडर और छत पर लगे एक पेरिस्कोप के साथ पराबैंगनी (UV) कैमरा लगाया गया था।
  • खोज: नॉर्थ कैरोलिना में एक तूफान के दौरान, टीम ने 90 मिनट के भीतर पत्तियों की नोक पर 41 कोरोना घटनाओं को दर्ज किया। यह चमक लगभग तीन सेकंड तक रहती थी और हवा चलने पर एक पत्ती से दूसरी पत्ती पर ‘कूदती’ हुई दिखाई देती थी। Business Today

पेड़ों पर इसका क्या असर होता है?

वैज्ञानिकों का मानना है कि यह चमक भले ही छोटी दिखे, लेकिन इसके प्रभाव गहरे हो सकते हैं:

  • पत्तियों को नुकसान: ये ‘कोरोना’ कुछ ही सेकंड में पत्ती की नोक को झुलसा सकते हैं।
  • प्रकाश संश्लेषण (Photosynthesis): बार-बार होने वाले विद्युत प्रवाह से कोशिका झिल्ली (Cell membranes) और क्लोरोप्लास्ट को नुकसान पहुँच सकता है, जिससे पेड़ के भोजन बनाने की प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है।
  • विकासवाद: भविष्य में पेड़ खुद को इस बिजली के नुकसान से बचाने के लिए नए तरीके विकसित कर सकते हैं।

मैकफारलैंड के अनुसार, “अगर आपकी दृष्टि सुपरह्यूमन होती, तो आप तूफान के दौरान हर पेड़ के ऊपर हजारों चमकते जुगनुओं जैसा नजारा देखते।”

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