ढाका: बांग्लादेश में शेख हसीना के तख्तापलट के बाद राजनीतिक घमासान थमने का नाम नहीं ले रहा है। अब बांग्लादेश के राष्ट्रपति मोहम्मद शहाबुद्दीन और कार्यवाहक सरकार के बीच का विवाद सार्वजनिक हो गया है। इस विवाद में कूदते हुए कट्टरपंथी संगठन जमात-ए-इस्लामी के अमीर (प्रमुख) शफीकुर रहमान ने राष्ट्रपति पर तीखा हमला बोला है, जिसे विशेषज्ञ यूनुस सरकार और इस्लामवादियों के बीच बढ़ते गठजोड़ के रूप में देख रहे हैं।

राष्ट्रपति शहाबुद्दीन के सनसनीखेज आरोप:
एक हालिया साक्षात्कार (कालेर कांठो) में राष्ट्रपति शहाबुद्दीन ने मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार पर गंभीर आरोप लगाए:

  • अवैध नजरबंदी: राष्ट्रपति ने दावा किया कि यूनुस प्रशासन ने उन्हें ‘अघोषित घर में नजरबंद’ (Virtual House Arrest) जैसा रखा है।
  • इलाज पर रोक: उन्होंने आरोप लगाया कि सिंगापुर में उनकी बाईपास सर्जरी के बाद फॉलो-अप के लिए उन्हें विदेश जाने की अनुमति नहीं दी गई।
  • संवैधानिक उल्लंघन: राष्ट्रपति के अनुसार, अमेरिका के साथ हुए एक गुप्त व्यापारिक समझौते (NDA के तहत) की जानकारी उन्हें नहीं दी गई, जो एक संवैधानिक अनिवार्यता है।
  • हटाने की कोशिश: उन्होंने खुलासा किया कि सरकार ने उन्हें कई बार पद से हटाने की कोशिश की, लेकिन सेना और विपक्षी दल BNP के समर्थन के कारण वह पद पर बने हुए हैं।

जमात-ए-इस्लामी का पलटवार:
हैरानी की बात यह है कि यूनुस सरकार के बचाव में खुद सरकार के बजाय जमात-ए-इस्लामी के प्रमुख शफीकुर रहमान सामने आए। उन्होंने फेसबुक पर राष्ट्रपति की आलोचना करते हुए कहा:

  • राष्ट्रपति 5 अगस्त (हसीना के भागने के दिन) की घटनाओं के बारे में तथ्यों को दबा रहे हैं।
  • उन्होंने आरोप लगाया कि राष्ट्रपति अब जो कह रहे हैं, वह उस दिन की उनकी बातों से बिल्कुल अलग है।

यूनुस और इस्लामवादियों का ‘नेक्सस’ (गठजोड़)?
राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि जमात प्रमुख का राष्ट्रपति पर हमला करना मोहम्मद यूनुस और कट्टरपंथी समूहों के बीच एक “म्युचुअल बेनिफिट” (परस्पर लाभ) के रिश्ते को दर्शाता है। इसके पीछे कई कारण बताए जा रहे हैं:

  1. प्रतिबंध हटाना: कार्यभार संभालने के कुछ ही दिनों बाद यूनुस सरकार ने जमात-ए-इस्लामी पर लगा प्रतिबंध हटा दिया था।
  2. आतंकियों की रिहाई: सरकार ने अंसारुल्लाह बांग्ला टीम के मास्टरमाइंड जसीमुद्दीन रहमानी और 1971 के युद्ध अपराधी ए.टी.एम. अजहरुल इस्लाम जैसे कट्टरपंथियों को जेल से रिहा कर दिया है।
  3. पाकिस्तान से नजदीकी: इस शासन के दौरान बांग्लादेश का झुकाव सैन्य और कूटनीतिक रूप से पाकिस्तान की ओर बढ़ा है।
  4. मंत्रिमंडल में छात्र नेता: हसीना विरोधी आंदोलन के कई छात्र नेता, जो अब जमात के साथ गठबंधन कर रहे हैं, यूनुस कैबिनेट में मंत्री पद पर हैं।

निष्कर्ष:
राष्ट्रपति शहाबुद्दीन और जमात चीफ के बीच की यह जुबानी जंग बताती है कि बांग्लादेश में लोकतंत्र और संविधान की रक्षा के नाम पर एक नई तरह की कट्टरपंथी राजनीति जड़ें जमा रही है। यह विवाद आने वाले समय में बांग्लादेश के राजनीतिक भविष्य और वहां होने वाले चुनावों की दिशा तय करेगा।


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