न्यूयॉर्क: जहाँ एक ओर यह डर बना हुआ है कि AI कोडर और सॉफ्टवेयर इंजीनियरों की जगह ले लेगा, वहीं एंथ्रोपिक (Anthropic) की प्रेसिडेंट डेनिएला अमोदेई का मानना है कि भविष्य में ह्यूमैनिटीज (मानविकी) और क्रिटिकल थिंकिंग की अहमियत पहले से कहीं ज्यादा बढ़ जाएगी।

मुख्य बातें:

  • कोडिंग बनाम ह्यूमन स्किल्स: अमोदेई के अनुसार, जैसे-जैसे AI सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट और कोडिंग के कामों को खुद करने लगेगा, वैसे-वैसे वे कौशल जो हमें ‘इंसान’ बनाते हैं, वे अधिक प्रासंगिक हो जाएंगे। खुद लिटरेचर की छात्रा रहीं अमोदेई ने कहा कि ह्यूमैनिटीज का अध्ययन करना अब “पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण” होगा।
  • AI की बढ़ती ताकत: एंथ्रोपिक के Claude Opus 4.6 मॉडल ने केवल 2 हफ्तों में खुद एक C कंपाइलर तैयार कर लिया। इसके अलावा, गूगल और माइक्रोसॉफ्ट जैसी कंपनियां अब अपना 30% कोड AI के जरिए तैयार कर रही हैं।
  • इंसानी बातचीत का महत्व: अमोदेई ने कहा कि भले ही इंटरनेट AI द्वारा बनाए गए कंटेंट से भर गया हो, लेकिन अंत में लोग इंसानों से बातचीत करना ही पसंद करते हैं। भविष्य में केवल कोडिंग जानना काफी नहीं होगा, बल्कि उसे समझने और परखने की क्षमता (Critical Thinking) जरूरी होगी।
  • व्हाइट-कॉलर जॉब्स पर खतरा: माइक्रोसॉफ्ट एआई प्रमुख मुस्तफा सुलेमान ने हाल ही में दावा किया था कि AI भविष्य में सभी ‘व्हाइट-कॉलर’ नौकरियों की जगह ले सकता है। एंथ्रोपिक के ‘Claude Cowork’ टूल ने भी TCS और इंफोसिस जैसी कंपनियों के लिए चिंता बढ़ा दी है।

निष्कर्ष:

भविष्य में कोडिंग जैसे तकनीकी कौशल के बजाय, विश्लेषण करने की क्षमता, नैतिकता और मानवीय संवाद जैसे कौशल ही इंसानों को AI से आगे रखेंगे।


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