भारत और अमेरिका के बीच हुआ ऐतिहासिक व्यापार समझौता (India-US Trade Deal) वैश्विक राजनीति में बड़ा कदम माना जा रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत पर लागू टैरिफ को 50% से घटाकर 18% कर दिया है। सवाल यह है कि क्या इससे भारत-रूस संबंधों पर असर पड़ेगा? जवाब है – नहीं। इसके पीछे पांच ठोस वजहें हैं।

1. भारत की रणनीतिक स्वतंत्रता

भारत किसी एक शक्ति-गुट का हिस्सा नहीं है। वह अमेरिका, रूस, यूरोप और ग्लोबल साउथ – सभी के साथ अपने हितों के अनुसार संबंध रखता है। यही संतुलनकारी नीति इस डील का आधार है।

2. यह सिर्फ आर्थिक समझौता है

भारत-अमेरिका डील का फोकस टैरिफ, मार्केट एक्सेस और सप्लाई चेन पर है। इसमें रूस की सुरक्षा, यूक्रेन युद्ध या NATO जैसे संवेदनशील मुद्दे शामिल नहीं हैं। इसलिए मास्को इसे अपने खिलाफ नहीं देखेगा।

3. भारत-रूस रिश्ते गहरे और बहुस्तरीय

  • भारत रूस से रक्षा उपकरण खरीदता है, जैसे S-400 एयर डिफेंस सिस्टम
  • परमाणु ऊर्जा और अंतरिक्ष सहयोग में भी दोनों देशों की साझेदारी है।
  • रूस जानता है कि भारत के साथ उसका रिश्ता दीर्घकालिक और भरोसेमंद है।

4. रूस के लिए भारत अहम साझेदार

यूक्रेन युद्ध के बाद जब अमेरिका और यूरोप ने रूस पर प्रतिबंध लगाए, तब भारत ने रूस से तेल खरीद जारी रखी। इस वजह से रूस भारत को नाराज करने का जोखिम नहीं उठाएगा।

5. रूस भी व्यावहारिक कूटनीति अपनाता है

रूस पाकिस्तान और तुर्की जैसे देशों से भी व्यापार करता है। इसलिए वह भारत से यह उम्मीद नहीं करेगा कि वह अमेरिका से आर्थिक रिश्ते तोड़ दे। मास्को भारत की संतुलित और यथार्थवादी नीति को समझता है।

निष्कर्ष

भारत-अमेरिका ट्रेड डील पुतिन के लिए कोई “रेड लाइन” नहीं है। यह भारत की संतुलनकारी विदेश नीति का हिस्सा है, जिसमें भारत अपने हितों के अनुसार सभी देशों से रिश्ते बनाए रखता है।

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