कोलकाता/नई दिल्ली: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से ठीक पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राज्य के मतदाताओं को बंगाली भाषा में एक भावुक पत्र लिखा है। सोमवार को जारी इस पत्र में पीएम ने बंगाल की वर्तमान स्थिति पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए लोगों से ‘सोच-समझकर’ निर्णय लेने की अपील की है। उन्होंने कहा कि आने वाली पीढ़ी का भविष्य मतदाताओं के इसी फैसले पर टिका है।

“सोनार बांग्ला का मेरा सपना अधूरा”

पीएम मोदी ने पत्र में लिखा कि स्वामी विवेकानंद और श्री अरबिंदो जैसे महापुरुषों की यह धरती आज “संकीर्ण वोट-बैंक की राजनीति, हिंसा और अराजकता” की भेंट चढ़ गई है।

  • भावुक अपील: “मेरे सपनों के सोनार बांग्ला के पुरुष, महिलाएं और बच्चे आज घोर अभाव का सामना कर रहे हैं। उनका दर्द मेरे हृदय पर भारी है। मैंने अपने अंतर्मन से संकल्प लिया है कि मैं पश्चिम बंगाल को एक समृद्ध राज्य में बदलकर रहूंगा।” Prime Minister’s Office

6 दशकों के कुशासन पर प्रहार

प्रधानमंत्री ने पिछले छह दशकों की राजनीति पर निशाना साधते हुए कहा:

  1. भ्रष्टाचार और असुरक्षा: उन्होंने राज्य को भ्रष्टाचार, तुष्टीकरण और “फर्जी मतदाताओं” के खेल से मुक्त करने का वादा किया। उन्होंने जोर दिया कि बंगाल में ऐसी सरकार चाहिए जहाँ महिलाएं सुरक्षित महसूस करें और युवाओं को काम के लिए पलायन न करना पड़े।
  2. CAA और घुसपैठ: पीएम ने स्पष्ट किया कि धार्मिक उत्पीड़न का सामना करने वाले शरणार्थियों को CAA के माध्यम से नागरिकता दी जाएगी और अवैध घुसपैठ को पूरी तरह रोका जाएगा। Ministry of Home Affairs

केंद्रीय योजनाओं का लेखा-जोखा

राज्य सरकार पर “असहयोग” का आरोप लगाते हुए पीएम ने अपनी सरकार के 11 साल के कार्यों का विवरण दिया:

  • जन धन योजना: राज्य के 5 करोड़ लोगों को बैंकिंग सेवाओं से जोड़ा गया।
  • स्वच्छ भारत: 85 लाख शौचालयों का निर्माण।
  • उज्ज्वला योजना: 1 करोड़ से अधिक महिलाओं को मुफ्त गैस कनेक्शन।
  • पीएम-किसान: 52 लाख से अधिक किसानों को सीधे आर्थिक सहायता दी गई। PM-Kisan Samman Nidhi

परिवर्तन का आह्वान

डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी, नेताजी सुभाष चंद्र बोस और रवींद्रनाथ टैगोर का जिक्र करते हुए मोदी ने कहा कि बंगाल कभी औद्योगिकीकरण और देश की अर्थव्यवस्था का नेतृत्व करता था। उन्होंने जनता से आह्वान किया कि वे 2026 तक एक “विकसित पश्चिम बंगाल” बनाने के लिए उनके साथ विकास की इस यात्रा में शामिल हों।


निष्कर्ष: पीएम मोदी का यह पत्र सीधे बंगाल की जनता के साथ भावनात्मक जुड़ाव बनाने और राज्य सरकार की विफलताओं को उजागर करने की एक बड़ी रणनीतिक कोशिश मानी जा रही है।


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